दिवाली पर दीये जलाने की अपील, सुप्रीम कोर्ट ने जनस्वास्थ्य और धार्मिक भावनाओं के संतुलन पर दिया जोर

दिवाली पर दीये जलाने की अपील, सुप्रीम कोर्ट ने जनस्वास्थ्य और धार्मिक भावनाओं के संतुलन पर दिया जोर

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नागरिकों से आग्रह किया कि वे दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी करने के बजाय दीये जलाने की अपनी मूल संस्कृति की ओर लौटें। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि उत्सव मनाते समय धार्मिक भावनाओं और जनस्वास्थ्य के बीच उचित संतुलन होना बेहद आवश्यक है।

दिवाली पर दीये जलाने की अपील, सुप्रीम कोर्ट ने जनस्वास्थ्य और धार्मिक भावनाओं के संतुलन पर दिया जोर

न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि लोगों की अंतरात्मा को जागृत करना और उन्हें स्वेच्छा से स्वच्छ प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करना अधिक स्थायी मार्ग है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयोमल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने लोगों को जागरूक करने और कम हानिकारक विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित करने पर बल दिया।

जनस्वास्थ्य और प्रदूषण पर चिंता

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील ने बच्चों तथा बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों का मुद्दा उठाया। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहते हैं, बल्कि नागरिकों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति खुद जागरूक करना चाहते हैं। न्यायालय ने अधिकारियों से यह भी सुझाव दिया कि वे लोगों से न्यूनतम आतिशबाजी करने और एक निश्चित समयावधि का पालन करने की अपील जारी करें।

पराली प्रबंधन और अन्य उपाय

इस सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या के अन्य पहलुओं जैसे पराली जलाने और ठोस कचरा प्रबंधन पर भी चर्चा की गई। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि फसल के अवशेषों के प्रबंधन के लिए नीतिगत ढांचा तैयार किया गया है और इस संबंध में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी बुधवार को तय की गई है।

Anju Kunwar

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