जनसंख्या और विवाह को लेकर पं. विजयशंकर मेहता के विचार

जनसंख्या और विवाह को लेकर पं. विजयशंकर मेहता के विचार

वर्तमान समय में देश के भीतर जनसंख्या और परिवार नियोजन के विषयों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं हो रही हैं। कई समाजों के जिम्मेदार लोग इस बात को लेकर अपनी चिंता प्रकट कर रहे हैं कि उनकी आबादी में लगातार कमी आ रही है। इस महत्वपूर्ण विषय पर पंडित विजयशंकर मेहता ने अपने कॉलम के माध्यम से प्रकाश डाला है और समाज के सामने आ रही इस स्थिति पर विचार करने की बात कही है।

जनसंख्या और विवाह को लेकर पं. विजयशंकर मेहता के विचार

पारंपरिक संस्कारों और सही आयु का महत्व

आलेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि हमारे प्राचीन ऋषियों और मुनियों ने विवाह के समय जो सप्तपदी और विभिन्न मंत्रों की रचना की थी, उनके पीछे एक बहुत बड़ा और दूरदर्शी उद्देश्य छिपा हुआ था। आज की युवा पीढ़ी को यह समझाने की अत्यंत आवश्यकता है कि जीवन के इस अहम पड़ाव का सही समय क्या होना चाहिए। यदि विवाह की निश्चित आयु और उसके बाद संतान प्राप्ति की निश्चित अवधि का संतुलन या औसत बिगड़ जाता है, तो आने वाले समय में समाज को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

वैश्विक दृष्टिकोण और अन्य देशों के प्रयास

इस लेख में पड़ोसी देश चीन का भी उल्लेख किया गया है, जहां आबादी से जुड़ी स्थितियों को संभालने के लिए ‘न्यू एरा’ नामक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत वहां के युवाओं को विवाह के महत्व के बारे में बताया जा रहा है और उन्हें सही समय पर विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही, विवाह के पश्चात उचित समय सीमा के भीतर बच्चों के जन्म को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के आर्थिक प्रोत्साहन या बर्थ बोनस भी दिए जा रहे हैं।

जनसंख्या और विवाह को लेकर पं. विजयशंकर मेहता के विचार

भविष्य के लिए समाज की जिम्मेदारी

चीन जैसे उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए, हमें भी यह विचार करना चाहिए कि हमारे समाज में भी इस दिशा में कदम उठाने की कितनी आवश्यकता है। हमें अपनी युवा पीढ़ी को अपने पारंपरिक मूल्यों और ऋषि-मुनियों द्वारा तय किए गए मार्ग के बारे में बताना चाहिए। यदि समय रहते विवाह की सही उम्र और संतान प्राप्ति की सही अवधि के महत्व को नहीं समझा गया, तो समाज को भविष्य में भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसलिए संतुलित आबादी और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के लिए इन बातों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।

Anju Kunwar

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