विशेषज्ञों के अनुसार ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और अंदर से खोखली हो जाती हैं। कई बार मामूली सी चोट या फिसलने पर भी गंभीर फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि इस बीमारी के शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट संकेत या दर्द नहीं दिखाई देता है।

हड्डियों के लिए सही खानपान
मजबूत हड्डियों के वास्ते आपके शरीर को हर दिन पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी की आवश्यकता होती है। दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और हरी पत्तेदार सब्जियों में भरपूर कैल्शियम पाया जाता है। इसके अलावा शरीर को कैल्शियम अब्जॉर्ब करने के लिए विटामिन डी की जरूरत होती है, जिसके लिए सुबह की धूप मददगार साबित हो सकती है। यदि शरीर में विटामिन डी का स्तर कम हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं।
शारीरिक सक्रियता और व्यायाम
हड्डियां तभी मजबूत रहती हैं जब आप उनका सक्रिय रूप से उपयोग करते हैं। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। नियमित रूप से पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना, हल्का जॉगिंग करना या संतुलन और योग के अभ्यास करने से गिरने का जोखिम कम होता है। भारी जिम वर्कआउट की जगह लगातार और नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना ज्यादा फायदेमंद है।

खानपान और वजन से जुड़ी सावधानियां
धूम्रपान करने से हड्डियों का घनत्व कम होता है और फ्रैक्चर के बाद ठीक होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। इसी तरह अत्यधिक शराब का सेवन भी हड्डियों के क्षरण को बढ़ावा देता है। इसके अलावा अत्यधिक कम वजन होना भी जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए संतुलित आहार और पर्याप्त प्रोटीन का सेवन करना आवश्यक है ताकि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और मजबूती मिल सके।
चिकित्सकीय जांच कब जरूरी है?
मेनोपॉज के बाद की महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, मामूली चोट से फ्रैक्चर का शिकार हुए लोगों और लंबे समय से स्टेरॉयड दवाइयां ले रहे मरीजों को डॉक्टर से परामर्श कर बोन डेंसिटी टेस्ट या डेक्सा स्कैन करवा लेना चाहिए। समय रहते जांच करवाने से हड्डियों की स्थिति का पता चल जाता है और गंभीर समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।

