भारत में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ 7वां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026

भारत में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ 7वां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026

भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित सातवें एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। इस तीन दिवसीय वैश्विक आयोजन के दौरान किसानों और विकासशील देशों यानी ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं को कृषि और सौर ऊर्जा के संयोजन से जुड़े विषयों के केंद्र में रखा गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह तलाशना था कि किस प्रकार एक ही भूमि पर खाद्य उत्पादन के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी किया जा सकता है, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि हो सके।

भारत में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ 7वां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026

वैज्ञानिक विमर्श और व्यावहारिक चर्चाएं

इस सम्मेलन के दौरान नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों और किसानों के बीच विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। चर्चाओं में कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुकूल फसलों का चयन, पानी का सही उपयोग, नवीन वित्तपोषण और आधुनिक तकनीक जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान द्वारा आयोजित सत्रों में छाया में उगने वाली फसलों और सौर पैनलों के सूक्ष्म-जलवायु प्रभावों पर वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर बातचीत की गई।

किसानों के अनुभवों को मिली प्राथमिकता

कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसानों और किसान उत्पादक संगठनों ने अपने मैदानी अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी एग्रीवोल्टाइक परियोजना का डिज़ाइन ज़मीनी हकीकत और किसानों की जरूरतों के अनुकूल होना चाहिए। इसके अलावा, सम्मेलन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को ‘नेशनल एग्रीवोल्टाइक पिच-हब अवार्ड’ और ‘बेस्ट पेपर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया ताकि नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

भारत में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ 7वां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026

फ्रांस को सौंपी गई अगले सम्मेलन की मेजबानी

समारोह के अंतिम चरण में आगामी आठवें एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2027 की मेजबानी आधिकारिक तौर पर फ्रांस को सौंप दी गई। नई दिल्ली में तय की गई इस रूपरेखा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए अब इस दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार भी सुनिश्चित किया जा सके।

Anju Kunwar

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