बच्चों को मेहनत और संघर्ष का पाठ पढ़ा रहे चीन के खास ‘हार्डशिप कैम्प’

बच्चों को मेहनत और संघर्ष का पाठ पढ़ा रहे चीन के खास 'हार्डशिप कैम्प'

आज के समय में कई माता-पिता अपने बच्चों को सभी सुख-सुविधाएं, महंगे गैजेट्स और आरामदायक जीवन देने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। हालांकि, इसके चलते कई बार बच्चे इन सुविधाओं को अपनी मेहनत का नतीजा समझने के बजाय अपना अधिकार मान लेते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए दक्षिण-पश्चिमी चीन के ग्रामीण इलाकों में अनोखे ‘हार्डशिप कैम्प’ चलाए जा रहे हैं, जहां बच्चों को कठिन शारीरिक श्रम का अनुभव कराया जाता है।

बच्चों को मेहनत और संघर्ष का पाठ पढ़ा रहे चीन के खास 'हार्डशिप कैम्प'

कड़े अनुशासन और श्रम के बीच समय बिताते हैं बच्चे

इन शिविरों में छह से सोलह साल तक के बच्चों को खेती के काम, जानवरों का गोबर साफ करने, लकड़ियां काटने और साधारण भोजन पकाने जैसे काम करने होते हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी मेहनत करने के बाद भी बच्चों को कोई भुगतान नहीं मिलता, बल्कि उनके माता-पिता इन कार्यक्रमों में उन्हें भेजने के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का भुगतान करते हैं। सिचुआन, गुइझोउ और युन्नान जैसे क्षेत्रों में आयोजित होने वाले इन समर प्रोग्राम्स के दौरान बच्चों को इंटरनेट और स्मार्टफोन से पूरी तरह दूर रखा जाता है।

शिविरों का मुख्य उद्देश्य और बच्चों पर प्रभाव

इस तरह के आयोजनों का मकसद बच्चों का बचपन मुश्किलों से भरना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों और असफलताओं का सामना करने के योग्य बनाना है। संचालकों के अनुसार, इसका उद्देश्य बच्चों में खाने-पीने के नखरे, आलस्य और मोबाइल की लत को दूर करना तथा माता-पिता की मेहनत के प्रति कृतज्ञता की भावना पैदा करना है। जब बच्चों को संघर्ष करना पड़ता है, तो वे धैर्य सीखते हैं और अपनी मेहनत से हासिल की गई चीजों की अधिक कद्र करते हैं।

बच्चों को मेहनत और संघर्ष का पाठ पढ़ा रहे चीन के खास 'हार्डशिप कैम्प'

विशेषज्ञों की राय और अभिभावकों के अनुभव

हालांकि, इन शिविरों के असर को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़े समय के कठिन शारीरिक श्रम को बच्चों की जीवनशैली में स्थाई सुधार से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जा सकता। इसके बावजूद, कई अभिभावकों का कहना है कि शिविर से लौटने के बाद बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आए हैं और वे अधिक संवेदनशील बने हैं। अंततः, बच्चों को केवल आरामदेह जीवन देने के बजाय उन्हें खुद मेहनती और सक्षम बनाना ही सबसे महत्वपूर्ण पूंजी है।

Anju Kunwar

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