आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के साथ शिक्षा और शिक्षण के तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। आज के समय में जब तकनीक तुरंत जानकारी उपलब्ध करा रही है, तब शिक्षाविदों का मानना है कि शिक्षकों की असली जिम्मेदारी छात्रों को खुद सोचने और समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रेरित करना है।

सीखने की क्षमता और ‘लर्नेबिलिटी’ पर जोर
AI के इस दौर में प्रभावी शिक्षण का मुख्य उद्देश्य छात्रों की ‘लर्नेबिलिटी’ यानी जीवनभर खुद सीखने की क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए। केवल तकनीकी कौशल सिखाने के बजाय, शिक्षकों को छात्रों में स्व-प्रेरित होकर सीखने का गुण विकसित करना चाहिए। इसके लिए कक्षाओं में ऐसे चुनौतीपूर्ण कार्य और परिस्थितियां तैयार की जानी चाहिए जो छात्रों को गहराई से सोचने पर मजबूर करें।
संरचित संवाद और जिज्ञासा का महत्व
कक्षाओं में पारंपरिक व्याख्यान के स्थान पर संरचित संवाद (Structured Dialogue) का उपयोग करके छात्रों की सोचने की प्रक्रिया को जीवित रखा जा सकता है। शिक्षकों को छात्रों को सिर्फ उत्तर देने के बजाय बेहतर सवाल पूछना सिखाना चाहिए। जिज्ञासा और पूरी इंसानियत का विकास ही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए, ताकि छात्र केवल परीक्षा पास करने वाले न बनें बल्कि जीवन की हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहें।

चुनौतियों के लिए तैयार करना
पारंपरिक रूप से शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को नौकरी के लिए तैयार करना रहा है, लेकिन आज के इस तेजी से बदलते समय में छात्रों को किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए लचीला और सक्षम बनाना आवश्यक हो गया है। AI को एक खतरे के रूप में देखने के बजाय इसे एक शिक्षण सहायक के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जो रचनात्मकता को बढ़ावा देने में मदद करता है।

