सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि अदालत पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक जमीनी स्तर पर आदेशों और दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन नहीं किया जाता, तब तक ऐसे निर्देश जारी करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

अदालत ने अधिकारियों को दी चेतावनी
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान जोर देकर कहा कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मामलों में अधिकारियों को पूरी गंभीरता से काम करना होगा। यदि नियमों का जमीनी स्तर पर पालन नहीं होता है, तो यह व्यवस्था के लिए एक मजाक बनकर रह जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वे जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं और पूरी तरह पाबंदी नहीं लगाना चाहते, लेकिन अधिकारियों को उन्हें सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।
वायु प्रदूषण और उठाए जा रहे कदम
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा वायु प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए जा रहे विभिन्न कदमों की जानकारी अदालत को दी। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले महीनों में पुराने वाहनों पर पाबंदी, निर्माण कार्यों पर रोक और कार्यालय के समय में बदलाव जैसे कई महत्वपूर्ण उपाय लागू किए जा रहे हैं।
बेरियम के इस्तेमाल पर विचार
केंद्र सरकार ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल से जुड़े विषय पर आंतरिक विचार-विमर्श अभी जारी है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सरकार ने अदालत से कुछ हफ्तों का समय मांगा है, जिस पर अदालत ने तीन सप्ताह बाद सुनवाई करने की बात कही है।

