कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते प्रभाव और टेक सेक्टर में आ रही सुस्ती के बीच पारंपरिक करियर योजनाओं पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत महसूस होने लगी है। हालांकि आईटी और तकनीक क्षेत्र लंबे समय से रोजगार का एक प्रमुख जरिया रहे हैं, लेकिन हालिया आंकड़ों से इस क्षेत्र में बदलाव के संकेत मिलते हैं।

टेक सेक्टर में नौकरियों के रुझान
आंकड़ों के अनुसार, देश के आईटी और बीपीएम क्षेत्र में नए स्नातकों की भर्तियों और कुल नई नौकरियों के सृजन में कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद, उच्च शिक्षा में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए दाखिले लगातार बढ़ रहे हैं। स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में युवा डिग्री हासिल कर रहे हैं, जबकि इसके मुकाबले इस क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं। इसके अलावा, नए स्नातकों के लिए शुरुआती वेतन में भी लंबे समय से कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है।
एआई और दफ्तरों के काम का भविष्य
यह बदलाव केवल एक विशेष उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर दफ्तरों में काम करने वाले अन्य पेशेवरों पर भी पड़ सकता है। रूटीन और तयशुदा प्रक्रियाओं पर आधारित कार्यों को अब एआई टूल्स आसानी से संभाल रहे हैं। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़े बुनियादी काम, कानूनी शोध, और ग्राहक सेवा से जुड़े कई कार्य अब तकनीक के जरिए तेजी से हो रहे हैं। इसका एक दीर्घकालिक प्रभाव यह भी हो सकता है कि भविष्य में वरिष्ठ पदों के लिए पर्याप्त अनुभवी पेशेवर तैयार होने में चुनौती आ सकती है।

करियर की योजना में बदलाव की जरूरत
पारंपरिक सफलता का फॉर्मूला अब बदल रहा है, जहां केवल एक डिग्री नौकरी की गारंटी नहीं देती। इस बदलते माहौल में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना आवश्यक है:
- एआई को समझें: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में हो रहे बदलावों पर नजर रखें और नए टूल्स का उपयोग सीखें।
- डिग्री के मोह से बाहर निकलें: केवल पारंपरिक डिग्रियों के पीछे भागने के बजाय व्यावहारिक हुनर को प्राथमिकता दें।
- हुनर को दें महत्व: तकनीकी कौशल और ब्लू-कॉलर जॉब्स को कमतर न समझें, क्योंकि उपयोगी और व्यावहारिक हुनर भविष्य में ज्यादा सुरक्षित हो सकते हैं।

