झारखंड के पलामू जिले में फुटबॉल खेल को बढ़ावा देने और ग्रामीण अंचलों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर मुहैया कराने की जोरदार मांग उठाई गई है। स्थानीय स्तर पर खेल प्रेमियों और जानकारों का मानना है कि प्रतिभाओं को सही मंच मिलने से राज्य में खेल का स्तर सुधर सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं
पलामू और आसपास के ग्रामीण इलाकों में फुटबॉल के प्रति युवाओं में गजब का उत्साह और प्रतिभा पाई जाती है। स्थानीय खेल प्रेमी व क्लब सीमित संसाधनों के बल पर ही प्रतियोगिताओं का आयोजन करने का प्रयास करते हैं, लेकिन उचित मार्गदर्शन और सुविधाओं के अभाव में कई बेहतरीन खिलाड़ी पीछे छूट जाते हैं। खिलाड़ियों को न तो नियमित रूप से प्रशिक्षण मिल पाता है और न ही आगे बढ़ने के लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया का लाभ मिलता है।
एसोसिएशन की कार्यशैली पर सवाल
झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन की कार्यशैली और आगामी चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। जानकारों का कहना है कि कागजी कार्रवाई या पदों पर नाम दर्ज कराने मात्र से खेल का जमीनी विकास संभव नहीं है। इसके लिए खेल निकायों को धरातल पर उतरकर खिलाड़ियों के साथ काम करना होगा और व्यवस्था में पारदर्शिता लानी होगी ताकि हर योग्य युवा को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सके।
सुधार के लिए प्रमुख सुझाव
- सभी पात्र क्लबों को साथ लेकर नियमित जिला फुटबॉल लीग का आयोजन किया जाए।
- खेल गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक स्पष्ट वार्षिक खेल कैलेंडर जारी हो।
- गांव और ब्लॉक स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए।
- खिलाड़ियों के चयन के लिए पारदर्शी और खुले चयन शिविर लगाए जाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खेल संघ इन सुझावों पर गंभीरता से काम करते हैं, तो पलामू और पूरे झारखंड के दूरदराज इलाकों से उभरते हुए फुटबॉल खिलाड़ी राज्य और देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

