इंदौर में संपन्न हुआ प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन

इंदौर में संपन्न हुआ प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित अभिनव कला समाज सभागृह में प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दो दिवसीय आयोजन में देश और प्रदेशभर से आए 150 से अधिक लेखकों ने हिस्सा लिया और विभिन्न सत्रों के माध्यम से महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-मंथन किया।

इंदौर में संपन्न हुआ प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन

शब्द सृजन का माध्यम, नफरत का हथियार नहीं

सम्मेलन के पहले दिन प्रख्यात भाषाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता गणेश देवी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि शब्द सृजन का माध्यम होते हैं और इनसे सृष्टि का निर्माण हुआ है, इसलिए इन्हें कभी भी नफरत या हत्या का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और इतिहास का हवाला देते हुए लोकतंत्र विरोधी ताकतों पर बात रखी। उद्घाटन सत्र में प्रतिरोध के अतीत और वर्तमान की चुनौतियों पर भी विमर्श हुआ, जिसमें सूफी संतों और पारंपरिक प्रतिरोध के इतिहास को याद किया गया।

सांप्रदायिकता, आदिवासी अधिकार और साहित्य की भूमिका

विभिन्न सत्रों के दौरान वक्ताओं ने आदिवासी अंचलों के प्रतिरोध, सांप्रदायिकता, फासीवाद और पूंजीवाद के गठजोड़ पर विस्तार से अपनी बात रखी। झारखंड से आए साहित्यकार रणेन्द्र ने सांप्रदायिकता और राष्ट्रवाद के संबंधों पर प्रकाश डाला, जबकि अन्य वक्ताओं ने हाशिए के समाज, सोशल मीडिया के दौर में शब्दों के महत्व और वैचारिक प्रतिबद्धता जैसे विषयों पर विचार रखे। सम्मेलन के दौरान पुस्तक और कविता पोस्टर प्रदर्शनी के साथ-साथ प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा वायलिन वादन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं।

नई कार्यकारिणी का गठन और जन सरोकार प्रस्ताव

सम्मेलन के अंतिम दिन नई कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसमें मोहन कुमार डहेरिया को प्रदेश अध्यक्ष और अनिल करमेले को महासचिव मनोनीत किया गया। इस दौरान केन-बेतवा नदी परियोजना के विस्थापितों, मणिपुर में शांति बहाली, आदिवासी अधिकारों, शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने और अंधविश्वास के खिलाफ कई महत्वपूर्ण जन सरोकार प्रस्ताव भी पारित किए गए।

Anju Kunwar

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