केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने बदला सुरक्षा ढांचा, नए सेक्टरों का हुआ गठन

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने बदला सुरक्षा ढांचा, नए सेक्टरों का हुआ गठन

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने देश के महत्वपूर्ण संस्थानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अपने संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव किया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब भौगोलिक क्षेत्रों के बजाय संस्थानों के विशेष कार्यों और उनकी सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर निगरानी की जाएगी।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने बदला सुरक्षा ढांचा, नए सेक्टरों का हुआ गठन

सुरक्षा व्यवस्था में किए गए प्रमुख बदलाव

गृह मंत्रालय की सहमति से लागू की गई इस नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य देश की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। पहले क्षेत्रीय कमान व्यवस्था के अंतर्गत एक ही सेक्टर को कई क्षेत्रों के 50 से अधिक संस्थानों की सुरक्षा देखनी पड़ती थी, जिससे विभागों के बीच समन्वय में कठिनाई आती थी। अब उद्योग की प्रकृति के अनुसार विशेष सेक्टरों का गठन किया गया है।

शामिल किए गए आठ नए सेक्टर

इस नई संरचना के तहत कुल आठ नए सेक्टरों की शुरुआत की गई है, जो विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी करेंगे:

  • पावर-एक (नई दिल्ली)
  • पावर-दो (कोलकाता)
  • कोयला (रांची)
  • इस्पात (भिलाई)
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (गुवाहाटी)
  • पश्चिमी तट बंदरगाह (मुंबई)
  • पूर्वी तट बंदरगाह (चेन्नई)
  • सरकारी इमारतें, संग्रहालय, स्मारक एवं मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (नई दिल्ली)

ये सभी नए सेक्टर पहले से कार्यरत एविएशन सेक्टर और परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग (डीएई एवं डीओएस) सेक्टर के साथ मिलकर काम करेंगे।

ड्रोन और साइबर हमलों से निपटने की तैयारी

इस पुनर्गठन के माध्यम से बल को आधुनिक समय की सुरक्षा चुनौतियों जैसे कि ड्रोन हमलों और साइबर हमलों का सामना करने के लिए विशेष रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग से देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन के अनुसार, इस नए ढांचे से विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग बेहतर होगा, जिससे आवश्यक निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे और अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

Anju Kunwar

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