खान मंत्रालय के अधीन संचालित भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के 55वें महानिदेशक के रूप में दिनेश विठ्ठलराव गणवीर ने कार्यभार संभाल लिया है। इस पद पर उनके आने से संगठन को तीन दशक से अधिक का विस्तृत तकनीकी, वैज्ञानिक और प्रशासनिक अनुभव प्राप्त हुआ है, जो उन्होंने भूविज्ञान, इंजीनियरिंग क्षेत्रों तथा खनिज अन्वेषण के कार्यों में अर्जित किया है।

उन्होंने नागपुर के आरटीएमएनयू विश्वविद्यालय से भूविज्ञान विषय में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात पहली जुलाई 1994 को इस संस्थान में अपनी सेवा की शुरुआत की थी। अपने तीन दशकों से ज्यादा लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने उत्तरी, पूर्वोत्तर और मध्य क्षेत्रों में कई तकनीकी और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं। महानिदेशक बनने से पूर्व वे नागपुर स्थित मध्य क्षेत्र के विभागाध्यक्ष एवं अपर महानिदेशक के पद पर कार्य करने के साथ राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-II का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे थे।
उनके अब तक के कार्यों में महाराष्ट्र की साकोली फोल्ड बेल्ट में हीरा एवं स्वर्ण अन्वेषण, पश्चिमी बस्तर क्रेटन का मानचित्रण और एलोरा गुफाओं तथा भीमबेटका शैलाश्रयों जैसे यूनेस्को स्थलों के संरक्षण से जुड़े भूवैज्ञानिक अध्ययन शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने रूस-भारत खनन उप-समूह, भारत-पेरू संयुक्त कार्य समूह और ऑस्ट्रेलिया की आईएमएआरसी 2022 बैठकों जैसे कई वैश्विक मंचों पर संस्थान का प्रतिनिधित्व किया है।

राष्ट्रीय मिशन प्रमुख के रूप में उन्होंने देशव्यापी खनिज खोज अभियानों और क्षेत्रीय कार्यक्रमों की निगरानी में अहम भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्वकाल में महत्वपूर्ण तथा रणनीतिक खनिजों से जुड़े खोज कार्यों को गति मिली है तथा नीलामी हेतु ब्लॉक तैयार करने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिला है।
नया पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने वैज्ञानिक गुणवत्ता, राष्ट्रीय प्रभाव और कार्यों में गहराई लाने पर विशेष बल दिया है। उनकी प्राथमिकताओं में उन्नत तकनीकों का प्रयोग, प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण, अपतटीय अन्वेषण और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की खोज में तेजी लाना शामिल है ताकि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिल सके।

