बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने से पहले बोलचाल सिखाना क्यों है जरूरी

बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने से पहले बोलचाल सिखाना क्यों है जरूरी

बच्चों को किसी भी नई भाषा में पारंगत करने के लिए केवल व्याकरण के नियमों को रटाना काफी नहीं होता है। शिक्षा और भाषा कौशल के जानकारों का मानना है कि बच्चों को भारी-भरकम किताबें थमाने से बेहतर है कि उन्हें दैनिक जीवन में बोलचाल का अभ्यास कराया जाए। रोजमर्रा की जिंदगी में संवाद करने से भाषा सीखने की प्रक्रिया न केवल सरल हो जाती है, बल्कि बच्चों का आत्मविश्वास भी तेजी से बढ़ता है।

बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने से पहले बोलचाल सिखाना क्यों है जरूरी

व्याकरण से ज्यादा संवाद का महत्व

अक्सर यह देखा जाता है कि छात्र वर्षों तक अंग्रेजी विषय की पढ़ाई करने और व्याकरण के नियम याद रखने के बावजूद धाराप्रवाह संवाद नहीं कर पाते हैं। वे परीक्षा में अच्छे अंक तो ले आते हैं, लेकिन यदि उनसे अंग्रेजी में अपना परिचय देने या सामान्य बातचीत करने के लिए कहा जाए, तो वे हिचकिचा जाते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि शिक्षण प्रणालियों में भाषा को बोलना सिखाने के स्थान पर उसे केवल पढ़ाना और पढ़ना सिखाया जाता है।

आसान और व्यावहारिक तरीके से शुरुआत

बच्चों में संवाद कौशल विकसित करने के लिए किसी महंगी तकनीक या जटिल कक्षाओं की आवश्यकता नहीं होती है। इस प्रक्रिया को बेहद सरल और चरणों में बांटा जा सकता है:

बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने से पहले बोलचाल सिखाना क्यों है जरूरी
  • पहला चरण: शुरुआती महीनों में बच्चों को अपना परिचय देना, अभिवादन करना और परिवार से जुड़ी सामान्य बातें करना सिखाया जाना चाहिए।
  • दूसरा चरण: इसके बाद उन्हें बाजार में खरीदारी करने, रास्ता पूछने या शिक्षकों व डॉक्टरों से बात करने जैसी व्यावहारिक बातचीत का अभ्यास कराना चाहिए।
  • तीसरा चरण: बाद के महीनों में उन्हें कहानी सुनाना, किसी घटना का वर्णन करना और अपनी राय व्यक्त करने जैसे कार्यों में शामिल किया जाना चाहिए।

आत्मविश्वास बढ़ाने का माहौल

कक्षाओं में ऐसा सकारात्मक माहौल होना चाहिए जहां बच्चे बिना किसी डर के बोल सकें। यदि कोई बच्चा गलती करता है, तो उस पर हंसने के बजाय उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। संवाद के दौरान जोड़े बनाकर अभ्यास करने और ऑडियो रिकॉर्डिंग के जरिए अपनी प्रगति देखने से सीखने की गति तेज होती है। यह समझना बेहद जरूरी है कि भाषा केवल बुद्धिमत्ता का पैमाना नहीं है, बल्कि यह उच्च शिक्षा और रोजगार के नए अवसर जरूर खोलती है। इसलिए बच्चों को व्याकरण की एक और किताब देने के बजाय उन्हें बोलचाल का एक सहज और खुला माहौल देना चाहिए।

Anju Kunwar

Learn More →