हाल ही में इजराइल की राजनीति में एक बार फिर बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति चर्चा का केंद्र बनी हुई है। हालांकि इस बार के चुनावों में उन्हें सीधा और पूर्ण जनादेश प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन उनकी पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं और धुर दक्षिणपंथी दलों का समर्थन उनके पास है। जानकारों का मानना है कि उन्हें हराया नहीं जा सका है, इसलिए इसे उनकी एक तरह की जीत माना जा रहा है।

नेतन्याहू पिछले करीब 17 वर्षों में से 16 साल तक सत्ता में बने रहे हैं। इस राजनीतिक निरंतरता के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा और पहचान जैसे मुद्दे सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं। जानकारों के अनुसार, आज के समय में मतदाता वैचारिक बहसों के मुकाबले लेन-देन वाले समीकरणों और सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा और बदलता इजराइली समाज
इजराइल में 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों के बाद से राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल चुका है। ईरान की घेराबंदी और निरंतर संघर्षों के बीच यहूदी आबादी के सामने राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। इस कठिन दौर में मतदाताओं ने बदलाव का जोखिम उठाने के बजाय मौजूदा नेतृत्व पर ही अधिक भरोसा जताया है। इजराइली समाज में गहरे मतभेद और उदारवादी समूहों की मौजूदगी के बावजूद, सुरक्षा के सवाल पर अधिकांश मतदाताओं का झुकाव कड़े रुख की तरफ रहा है।

अरब मतदाताओं की स्थिति और राजनीतिक समीकरण
इजराइल की संसद में मुस्लिम अरब आबादी की अच्छी खासी संख्या है और उन्होंने चुनावों में रिकॉर्ड मतदान भी किया है, लेकिन मुख्यधारा की कोई भी यहूदी पार्टी उनके साथ गठबंधन करने से बचती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हमास और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख न होने के कारण अरब दलों को राजनीतिक गठजोड़ में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे वे मुख्यधारा की राजनीति में हाशिए पर बने रहते हैं।

