राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह-कार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने इंदौर में आयोजित कार्यकारी बोर्ड की बैठक के दौरान कहा कि जिन लोगों को समाज में भेदभाव और सामाजिक पिछड़ेपन का सामना करना पड़ता है, उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आरक्षण को कभी भी वोट बैंक की राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

मतदाता सूची संशोधन और राष्ट्रीय सुरक्षा
बैठक में एसआईआर (SIR) के मुद्दे पर बोलते हुए होसबले ने इसे आवश्यक बताया और कहा कि इस पर किसी भी तरह की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में संशोधन का उद्देश्य चुनावी प्रणाली को पारदर्शी बनाना है। उन्होंने कहा कि सूची में कई ऐसे नाम होते हैं जो मृत लोगों के हैं, या जो लोग अपना शहर या गांव छोड़कर अन्यत्र बस चुके हैं, लेकिन उनके नाम पुरानी सूचियों में बने हुए हैं। इसके अलावा, मतदाता सूची में गैर-नागरिकों का नाम होना राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी उचित नहीं है। इसलिए निष्पक्ष चुनावों के लिए सभी को इस प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए और इसे राजनीतिक एजेंडा नहीं बनाना चाहिए।
संगठन का विस्तार और सेवा कार्य
दत्तात्रेय होसबले ने अपने संबोधन में संगठन के विस्तार और विभिन्न सेवा कार्यों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि ओडिशा, आंध्र प्रदेश, चित्रकूट और प्रयागराज जैसे विभिन्न स्थानों पर संघ के स्वयंसेवकों द्वारा राहत और चिकित्सा सेवा कार्य किए गए हैं, जिसके तहत अकेले प्रयागराज सहित विभिन्न स्थानों पर लगभग 5,600 लोगों को चिकित्सा देखभाल प्रदान की गई।
संगठन की गतिविधियों के आंकड़ों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि देश भर में साप्ताहिक बैठकों की संख्या 34,000 और मासिक बैठकों की संख्या 14,000 से अधिक हो गई है। शताब्दी वर्ष के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 65,000 से अधिक हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 5 करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष देश भर में संघ की शाखाओं में 12,000 की वृद्धि हुई है और वर्तमान में पूरे देश में 99,000 से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं।

