भारतीय सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम और वाहनों की आवाजाही को बेहतर ढंग से समझने के लिए आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक नया तरीका खोज निकाला है। अब ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि सड़कों पर वाहन किस रफ्तार से चल रहे हैं और जाम की स्थिति क्यों उत्पन्न होती है। इस शोध को इंटरनेशनल जर्नल आफ इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स रिसर्च में भी प्रकाशित किया गया है।

ड्रोन और एआई तकनीक से जुटाए गए आंकड़े
शोधकर्ताओं ने दिल्ली के पास स्थित एक राजमार्ग पर ड्रोन का इस्तेमाल करके उच्च रिजोल्यूशन वाले यातायात आंकड़े एकत्र किए। इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 36 हजार से ज्यादा वाहनों और उनकी करीब 90 लाख लोकेशन को दर्ज किया गया। इन आंकड़ों के माध्यम से यह अध्ययन किया गया कि सड़क पर गाड़ियों की संख्या बढ़ने पर उनकी गति में किस प्रकार बदलाव आता है। इसके आधार पर टीम ने छह गणितीय मॉडल और दो मशीन लर्निंग मॉडल तैयार किए हैं जो यातायात का सटीक पूर्वानुमान लगा सकते हैं।
भारतीय यातायात की अनूठी परिस्थितियों पर आधारित शोध
विदेशों में विकसित कई पुराने ट्रैफिक मॉडल ऐसी सड़कों के लिए बनाए गए हैं जहां यातायात काफी व्यवस्थित होता है। इसके विपरीत, भारतीय सड़कों पर एक ही मार्ग पर कार, बाइक, ऑटो, बस, ट्रक और पैदल चलने वाले लोग एक साथ चलते हैं, जिससे वाहनों की गति और उनके बीच की दूरी लगातार बदलती रहती है। इसी भिन्नता को ध्यान में रखते हुए आईआईटी गुवाहाटी के विशेषज्ञों ने देश की वास्तविक सड़क परिस्थितियों के अनुसार इन मॉडलों को विकसित किया है।
याचयात बढ़ने पर वाहनों की गति में बदलाव
अध्ययन के दौरान यह सामने आया कि जब सड़क खाली होती है, तो वाहन एक-दूसरे से काफी दूरी बनाकर चलते हैं। हालांकि, गाड़ियों की संख्या बढ़ने पर उनके बीच की दूरी कम होने लगती है और भारी भीड़ होने पर जाम जैसी स्थिति बन जाती है। सामान्य ट्रैफिक के दौरान एक निश्चित बिंदु से एक लेन से लगभग तीन हजार वाहन गुजरे, जबकि जाम की स्थिति में सड़क पर वाहनों की सघनता प्रति किलोमीटर काफी अधिक दर्ज की गई, जिससे उनकी गति लगभग शून्य हो जाती है।

