इस वर्ष प्रकाश पर्व के अवसर पर समाज में एक नई सोच को अपनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हम सब घरों में दीप प्रज्वलित करते हैं और उनकी पूजा करते हैं, जो कभी कोई शोर नहीं मचाते। हालांकि, उन दीपों को जलाने वाले लोग अक्सर उत्सव के दौरान काफी शोर और धुआं पैदा करके प्रकृति को नुकसान पहुंचाते हैं। इस स्थिति में यह विचार करने की जरूरत है कि हम किस प्रकार के प्रकाश की बात कर रहे हैं।

प्राकृतिक प्रकाश और सूर्य का महत्व
इस दुनिया का सबसे अद्भुत और सुंदर प्रकाश वह है, जो हर सुबह सूर्य देव द्वारा हमें प्रदान किया जाता है। पूरे साल हम न तो सूर्य की पूजा करते हैं और न ही उसके प्रकाश का उचित सम्मान करते हैं। आज के समय में अधिकांश लोग सूर्योदय के बाद नींद से जागते हैं, जिसे सूर्य के प्रकाश का अनादर माना जा सकता है। हम प्रकृति से मिलने वाली इस अनमोल और निःशुल्क पूंजी की उपेक्षा कर देते हैं और केवल दीपावली की रात कुछ दीपक जलाकर प्रकाश की पूजा करने का संतोष पा लेते हैं। दीपों का सम्मान अपनी जगह आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही सूर्य देव के प्रकाश और महत्व को भी समझना होगा।

ग्रोथ और गिविंग का संतुलन
इस बार दीपावली के पावन पर्व पर हमें अपने जीवन में ‘ग्रोथ’ यानी प्रगति और ‘गिविंग’ यानी दान व परोपकार दोनों को एक साथ लेकर चलना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति को अपनी मेहनत से खूब धन और संपन्नता अर्जित करनी चाहिए, लेकिन अपनी कुल कमाई या आय में से एक निश्चित हिस्सा उन लोगों की सहायता के लिए भी निकालना चाहिए जिन्हें इसकी अत्यधिक आवश्यकता है। समाज के वंचित वर्ग तक मदद पहुंचाकर ही इस पर्व की सार्थकता साबित हो सकती है।

