पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में पंजीकृत लगभग 1.1 लाख डॉक्टरों के पंजीकरण की फिर से जांच करने का फैसला किया है। यह कदम एक नमूना सर्वेक्षण के दौरान कई फर्जी चिकित्सकों के सामने आने के बाद उठाया गया है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता लाना है।

‘नो योर डॉक्टर’ पहल की मुख्य बातें
राज्य मेडिकल काउंसिल के साथ बैठक के बाद इस पूरी प्रक्रिया को ‘नो योर डॉक्टर’ (KYD) नाम दिया गया है। इसके जरिए सभी पंजीकृत डॉक्टरों की पहचान, उनकी चिकित्सा योग्यताओं और पंजीकरण प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच की जाएगी। इस मुहिम का मकसद न केवल फर्जी डॉक्टरों की पहचान करना है, बल्कि उन चिकित्सकों के नाम भी सूची से हटाना है जिनका निधन हो चुका है, जो विदेश चले गए हैं या जिन्होंने चिकित्सा अभ्यास करना बंद कर दिया है।
सत्यापन की प्रक्रिया
यह सत्यापन दो अलग-अलग तरीकों से किया जाएगा, जिसमें मैनुअल नो योर डॉक्टर (MKYD) और वीडियो नो योर डॉक्टर (VKYD) शामिल हैं। जो डॉक्टर व्यक्तिगत रूप से स्टेट मेडिकल काउंसिल जा सकते हैं, उन्हें अपने दस्तावेज जमा करने होंगे। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों या दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले चिकित्सकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा, अन्य राज्यों से आकर पश्चिम बंगाल में बसने वाले डॉक्टरों के मूल दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों की जांच के लिए संबंधित राज्यों में अधिकारी भेजे जाएंगे।
डेटाबेस को अपडेट करना
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस सत्यापन अभियान का उद्देश्य किसी की मौजूदा पंजीकरण की वैधता पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि डेटाबेस को व्यवस्थित करना है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सभी मौजूदा पंजीकरण वैध बने रहेंगे। विभाग ने इस संबंध में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से भी संपर्क किया है ताकि कानूनी पहलुओं पर स्पष्टता मिल सके।

