बिहार में रबी फसल का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य, वैकल्पिक फसलों पर मिलेगी 40 फीसदी सब्सिडी

बिहार में रबी फसल का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य, वैकल्पिक फसलों पर मिलेगी 40 फीसदी सब्सिडी

बिहार सरकार ने कृषि उत्पादन में वृद्धि करने, फसलों में विविधता लाने और किसानों की आय में सुधार के उद्देश्य से आगामी रबी सीजन के दौरान खेती के रकबे को लगभग 14 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। राज्य में इस बार रबी महाअभियान के तहत खेती का कुल लक्ष्य 48 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया है।

बिहार में रबी फसल का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य, वैकल्पिक फसलों पर मिलेगी 40 फीसदी सब्सिडी

विस्तार योजना और प्रमुख फसलें

राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, पिछले साल 42 लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी फसलों की खेती की गई थी, जिसे इस बार बढ़ाकर 48 लाख हेक्टेयर करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। इस विस्तार योजना के अंतर्गत 24 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं और छह लाख हेक्टेयर भूमि पर स्प्रिंग मक्का उगाने की योजना है। इसके अतिरिक्त, पांच लाख हेक्टेयर में दलहन, चार लाख हेक्टेयर में तिलहन और शेष नौ लाख हेक्टेयर भूमि पर आलू, सब्जियां, मसाले व अन्य फसलों की खेती की जाएगी।

वैकल्पिक फसलों और सब्जियों के लिए सब्सिडी

पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर किसानों को हल्दी, अदरक, टमाटर, गोभी, मिर्च और स्प्रिंग सीजन की प्याज जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत किसानों को इन वैकल्पिक फसलों की खेती की लागत पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह वित्तीय सहायता 0.1 हेक्टेयर से लेकर दो हेक्टेयर तक के क्षेत्रफल पर खेती करने वाले छोटे किसानों को दी जाएगी।

बिहार में रबी फसल का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य, वैकल्पिक फसलों पर मिलेगी 40 फीसदी सब्सिडी

विभिन्न फसलों के लिए निर्धारित लागत और सहायता

हल्दी और अदरक की खेती के लिए सरकार ने प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये लागत तय की है, जिस पर किसानों को 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक का अनुदान मिलेगा। इसी प्रकार टमाटर, मिर्च और गोभी के लिए 60 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की लागत तय की गई है, जिस पर 24 हजार रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। प्याज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ‘भीमा शक्ति’ और ‘एग्रीफाउंड लाइट रेड’ जैसी उन्नत किस्मों को शामिल किया गया है, जिस पर तय लागत के आधार पर प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी।

निगरानी और समीक्षा

सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि वे जमीनी स्तर पर कार्यों की प्रगति पर नजर रखें और यदि कहीं भी काम में कमी पाई जाती है, तो तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं।

Anju Kunwar

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