कमजोर मानसून और अल नीनो के प्रभाव के चलते इस साल देश में धान के उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, इस सीजन चावल के उत्पादन में लगभग एक करोड़ टन की कमी आ सकती है।

चावल उत्पादन और रकबे में गिरावट
बीते वर्ष देश में रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन चावल का उत्पादन दर्ज किया गया था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा घटकर करीब 14.4 करोड़ टन रहने की संभावना है। यह पिछले एक दशक के दौरान चावल उत्पादन में होने वाली सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। उत्पादन घटने की मुख्य वजह मानसून के दौरान कम बारिश होना और फसल तैयार होने के समय नमी की कमी रहना है। इसके कारण धान का कुल रकबा भी पिछले साल के 445.92 लाख हेक्टेयर से घटकर 429.28 लाख हेक्टेयर पर आ गया है।
अन्य खरीफ फसलों पर भी असर
बारिश की कमी का असर केवल धान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख खरीफ फसलों की खेती भी इससे प्रभावित हुई है। इस वर्ष खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले घटकर 1103.90 लाख हेक्टेयर रह गया है। आंकड़ों के मुताबिक, मक्का और सोयाबीन के रकबे में भी कमी दर्ज की गई है। देश के कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जिससे कृषि क्षेत्र के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं।
सरकारी बफर स्टॉक से राहत
उत्पादन में संभावित कमी के बावजूद राहत की बात यह है कि देश में पर्याप्त मात्रा में बफर स्टॉक उपलब्ध है। सितंबर तक राज्यों के पास लगभग 5.96 करोड़ टन का सरकारी खाद्यान्न भंडार मौजूद है, जो आवश्यकता से अधिक है। इसलिए घरेलू आपूर्ति और निर्यात पर इसका तत्काल कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

