डोमचांच प्रखंड के अंतर्गत आने वाली ढाब पंचायत के एक छोर पर स्थित बिरहोर बस्ती में आधुनिक विकास के इस दौर के बावजूद लोग बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। यहां रहने वाले बिरहोर समुदाय के परिवारों को शुद्ध पेयजल, सुगम मार्ग और पक्के मकानों जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। बस्ती में सुविधाओं के अभाव के कारण स्थानीय लोगों का जीवन काफी कठिन हो गया है और वे कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

पक्की सड़क और परिवहन की गंभीर समस्या
इस बस्ती तक पहुंचने के लिए कोई भी पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को रोजाना आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से वर्षा ऋतु के दौरान रास्ते की हालत बेहद खराब हो जाती है, जिससे इस क्षेत्र में यातायात और आना-जाना लगभग बाधित हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि किसी भी प्रकार की चिकित्सीय आपातकाल या स्वास्थ्य संबंधी स्थिति के समय मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में रास्ते की बदहाली के कारण भारी बाधा उत्पन्न होती है, जिससे समय पर इलाज मिलना भी मुश्किल हो जाता है।
शुद्ध पेयजल का अभाव और संकट
बस्ती के भीतर स्वच्छ और शुद्ध पेयजल की कोई पुख्ता तथा स्थायी व्यवस्था नहीं मौजूद है। पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोगों को पानी की तलाश में काफी दूर तक पैदल जाना पड़ता है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और समय दोनों प्रभावित होते हैं। स्थायी पेयजल स्रोत के अभाव में यहां के निवासियों को पानी की समस्या को लेकर हर दिन संघर्ष करना पड़ता है।
अधूरे पड़े प्रधानमंत्री आवास
इसके अतिरिक्त, गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत शुरू किए गए कई आवासों का निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है। इन आवासों का निर्माण समय पर पूरा न होने के कारण संबंधित परिवारों को आज भी पुराने और असुविधाजनक घरों में ही रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत मदद मिलने की उम्मीद तो जरूर जगी थी, लेकिन निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारण उनकी समस्याएं पहले की तरह ही बनी हुई हैं।

