जीवन में किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल उत्साह या सक्रियता होना ही काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत संकल्प-शक्ति की आवश्यकता होती है। पं. विजयशंकर मेहता के अनुसार, आज की नई पीढ़ी कुछ अलग और अनूठा करने में माहिर जरूर है, लेकिन कई बार संकल्प-शक्ति की कमी के कारण वे आधे रास्ते में ही थक जाते हैं। किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए यह समझना जरूरी है कि संकल्प की प्रक्रिया किस प्रकार काम करती है और इसके लिए मन को कैसे साधा जाए।

संकल्प का सही स्वरूप और उसकी गहराई
अक्सर लोगों का यह मानना होता है कि संकल्प केवल मन में लिया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि संकल्प केवल मन का नहीं बल्कि आत्मा, हृदय और मस्तिष्क का एक मिलाजुला विषय है। जब भी कोई दृढ़ निश्चय किया जाए, तो इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वह पूरी तरह सात्विक हो, अन्यथा गलत दिशा में जाने पर वह विनाशकारी या हिंसक रूप भी ले सकता है। इसलिए हर बड़े निश्चय के साथ संयम का होना अनिवार्य माना गया है।
मन की भूमिका और नियंत्रण के उपाय
जब हम सुबह जल्दी उठने या सैर पर जाने जैसे छोटे-छोटे संकल्प लेते हैं और अलार्म बजने पर भीतर से कोई आवाज हमें यह समझाती है कि आज रहने दें और कल से शुरुआत करेंगे, तो यह असल में मन का ही काम होता है। मन हमेशा उस लिए गए संकल्प को तोड़ने का प्रयास करता है। यही कारण है कि जब भी जीवन में कोई नया संकल्प लें, तो सबसे पहले अपने मन को नियंत्रित करना सीखें। ऐसा करने पर ही आपका लिया गया हर निर्णय शत-प्रतिशत सफल हो सकता है और बिना किसी रुकावट के पूरे किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष
जीवन की दौड़ में सफलता पाने के लिए निरंतर प्रयास और संयम दोनों की आवश्यकता होती है। यदि आप अपने विचारों को सही दिशा देकर मन की चाल को समझ जाएं, तो किसी भी लक्ष्य को पाना असंभव नहीं रह जाता है।

