भारत में यूपीआई भुगतान और एमडीआर शुल्क: एक विहंगम दृष्टि

भारत में यूपीआई भुगतान और एमडीआर शुल्क: एक विहंगम दृष्टि

भारत की डिजिटल भुगतान की कहानी देश के हालिया आर्थिक इतिहास के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है। यूपीआई ने देश के हर वर्ग और भौगोलिक क्षेत्र तक अपनी पहुंच बनाई है, जिससे रोजमर्रा के लेन-देन बेहद आसान हो गए हैं।

भारत में यूपीआई भुगतान और एमडीआर शुल्क: एक विहंगम दृष्टि

नीति आयोग के पूर्व सीईओ और भारत के पूर्व जी-20 शेरपा अमिताभ कांत के अनुसार, यूपीआई डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की एक व्यापक व्यवस्था से उभरा है। जनधन, आधार और मोबाइल के ‘जेएएम’ फ्रेमवर्क ने बैंक खातों, डिजिटल पहचान और मोबाइल कनेक्टिविटी को जोड़कर इस क्रांति की नींव रखी। इस खुली और इंटर-ऑपेरेबल व्यवस्था ने बैंकिंग और तकनीकी कंपनियों को नवाचार के लिए बेहतरीन मंच प्रदान किया।

बढ़ते ट्रांजैक्शन और बुनियादी ढांचे की जरूरतें

जैसे-जैसे यूपीआई के जरिए होने वाले लेन-देन की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, वैसे ही इसके बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता भी बढ़ गई है। प्रोसेसिंग क्षमता, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और विवादों के निपटारे के लिए बैंकों और तकनीकी कंपनियों को लगातार निवेश करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते ट्रांजैक्शन के साथ सिस्टम के जोखिम भी जटिल हो रहे हैं, जिसके चलते इसे चलाने की लागत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

एमडीआर फ्रेमवर्क और उसका दायरा

इसी पृष्ठभूमि में चुनिंदा यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी ‘एमडीआर’ लागू किया जा रहा है। यह स्पष्ट किया गया है कि एमडीआर कोई कर नहीं है और इससे मिलने वाली राशि सरकार के पास नहीं जाती, बल्कि यह भुगतान इकोसिस्टम के भीतर ही संस्थाओं में बांटा जाने वाला शुल्क है।

भारत में यूपीआई भुगतान और एमडीआर शुल्क: एक विहंगम दृष्टि
  • व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले सभी ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
  • दो हजार रुपए तक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।
  • स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे दुकानदारों के लिए एमडीआर शून्य रखा गया है, जिससे लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन अप्रभावित रहेंगे।

विशेष क्षेत्रों जैसे रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और कृषि इनपुट में दो हजार रुपए से अधिक के लेन-देन पर पांच रुपए का एमडीआर निर्धारित किया गया है, जबकि कैपिटल मार्केट से जुड़े ट्रांजैक्शन के लिए अलग सीमा तय की गई है। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूजर के लिए सेवा मुफ्त होने का यह अर्थ नहीं है कि सिस्टम को संचालित करने में कोई लागत नहीं आती। इस विशाल नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक टिकाऊ आर्थिक मॉडल की आवश्यकता है ताकि सुरक्षा और तकनीकी क्षमता को भविष्य में भी बरकरार रखा जा सके।

Anju Kunwar

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