कोलकाता में सोलह साल की उम्र में दुर्लभ हृदय शल्य चिकित्सा सफल

कोलकाता में सोलह साल की उम्र में दुर्लभ हृदय शल्य चिकित्सा सफल

कोलकाता में एक सोलह वर्षीय किशोरी की जटिल जन्मजात हृदय दोष के लिए फॉन्टन सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। वित्तीय समस्याओं और छाती पर बड़े शल्य चिकित्सा के निशान के डर के कारण इस इलाज में लगभग सोलह वर्षों का विलंब हुआ था। इस सफल चिकित्सा प्रक्रिया ने किशोरी को एक नया जीवन दिया है और उसकी रिकवरी भी उम्मीद से बेहतर रही है।

कोलकाता में सोलह साल की उम्र में दुर्लभ हृदय शल्य चिकित्सा सफल

जन्मजात हृदय दोष और इलाज में देरी

इस किशोरी को जब केवल दो महीने की उम्र थी, तब उसमें जन्मजात हृदय की स्थिति का पता चला था। उस समय चिकित्सकों ने परिवार को चेतावनी दी थी कि भविष्य में शल्य चिकित्सा की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, शिशु अवस्था में ओपन-हार्ट सर्जरी के जोखिम, वित्तीय परेशानियों और बेटी के शरीर पर दिखने वाले निशान को लेकर परिवार निर्णय लेने में असमर्थ रहा।

जैसे-जैसे बच्ची बड़ी हुई, उसकी शारीरिक स्थिति और अधिक प्रभावित होने लगी। थोड़ी दूर पैदल चलने पर उसे सांस लेने में कठिनाई होती थी और वह अन्य बच्चों की तरह खेलकूद में भाग नहीं ले पाती थी। जब वह सोलह वर्ष के करीब पहुंची, तो परिवार ने दोबारा चिकित्सा सहायता ली। जांच के दौरान उसके हृदय में जटिल संरचनात्मक असामान्यता पाई गई और भर्ती के समय उसका ऑक्सीजन स्तर सामान्य से काफी कम साठ से पैंसठ प्रतिशत पाया गया।

विशेषज्ञों का निर्णय और शल्य चिकित्सा

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुंतल रॉय चौधरी ने बताया कि यह समस्या जन्मजात थी। चिकित्सकों ने पाया कि केवल हृदय के कक्षों के बीच के बड़े छिद्र को बंद करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके लिए एक ऐसी परिसंचरण व्यवस्था स्थापित करनी थी जो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचा सके। सीटी स्कैन और कार्डियक कैथेटरियन जैसी विस्तृत जांच के बाद विशेषज्ञों ने फॉन्टन प्रक्रिया को सबसे उपयुक्त विकल्प माना।

परिवार की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, डॉक्टरों ने पारंपरिक चीरे के बजाय छाती के किनारे से चीरा लगाकर फॉन्टन प्रक्रिया को अंजाम देने का निर्णय लिया। इस वैकल्पिक दृष्टिकोण में कई चुनौतियां थीं क्योंकि यह सर्जरी आमतौर पर कम उम्र में की जाती है और अधिक उम्र में जोखिम बढ़ जाते हैं। इसके बावजूद, सभी जोखिमों और फायदों का आकलन करने के बाद डॉक्टरों ने सुरक्षित तरीके से इस ऑपरेशन को पूरा किया।

सफल रिकवरी और अस्पताल से छुट्टी

यह जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक संपन्न हुई और किशोरी ने उम्मीद से अधिक तेजी से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। प्रक्रिया के सात दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अनुवर्ती जांचों से यह स्पष्ट हुआ है कि किशोरी की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है और वह सामान्य जीवन की ओर लौट रही है। डॉक्टरों के अनुसार, छाती के किनारे से इस प्रकार की फॉन्टन प्रक्रिया का यह एक दुर्लभ मामला है।

Anju Kunwar

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