दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने हाल ही में दिल्ली सरकार के अभियोजन निदेशालय के कामकाज की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक के दौरान उन्होंने अदालती मामलों के निपटारे में हो रही अनावश्यक देरी और कम दोषसिद्धि दर पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उपराज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय मिलने में देरी का अर्थ न्याय न मिलने के समान है और सभी संबंधित विभागों को इस स्थिति में सुधार के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।

सुधार के लिए पांच सूत्रीय कार्ययोजना
न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने के लिए उपराज्यपाल ने एक पांच सूत्रीय फार्मूला पेश किया है, जिसके तहत मामलों की निगरानी प्रणाली को पूरी तरह से बदला जाएगा। फाइलों के आवंटन को सुव्यवस्थित किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से मामले लंबित हैं और उनके पीछे क्या कारण हैं। इसके अलावा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा और जहां कानूनी रूप से अनुमति हो, वहां अनुपस्थिति में सुनवाई शुरू की जाएगी।
जांच और अभियोजन पक्ष की जवाबदेही
जांच अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया गया है ताकि साक्ष्यों का संकलन मजबूत हो सके। अदालतों में आरोपियों के बरी होने के कारणों का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा ताकि जांच या अभियोजन स्तर पर हुई चूकों को पकड़ा जा सके और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सके। अभियोजकों, दिल्ली पुलिस और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के बीच दैनिक समन्वय को भी बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालतों में मुकदमों की पैरवी होगी मजबूत
चार्जशीट अदालत में दाखिल करने से पहले उसकी गहन पूर्व-परीक्षण जांच की जाएगी। साथ ही, अदालतों में बार-बार सुनवाई टालने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाएगी और गवाहों की समय पर गवाही सुनिश्चित की जाएगी। उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि न्याय दिलाने में किसी भी तरह की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी एजेंसियों को पूरी तत्परता के साथ काम करना होगा।

