हॉलीवुड में इन दिनों तकनीकी जगत के शीर्ष अरबपतियों को लेकर बनने वाली फिल्मों की पटकथा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सिलिकॉन वैली के इन दिग्गजों पर आधारित नई फिल्में अब उन्हें केवल तकनीकी विशेषज्ञ दिखाने के बजाय उनकी महत्वाकांक्षाओं और उदासीनता के लिए कटघरे में खड़ा कर रही हैं।

हॉलीवुड फिल्मों में बदलता नजरिया
वर्ष 2000 के डॉट कॉम संकट के बाद आई फिल्में या तो उत्सवधर्मी हुआ करती थीं या फिर तकनीक प्रेमियों की आंशिक रूप से हास्यपूर्ण त्रासदियों को दर्शाती थीं। हालांकि, अब हॉलीवुड का रुख बदल चुका है और ऐसी फिल्मों की बाढ़ आ रही है जो यूनानी त्रासदियों के अधिक करीब हैं। इन फिल्मों के मुख्य निशाने पर सैम ऑल्टमैन, मार्क जकरबर्ग और इलॉन मस्क जैसे नाम शामिल हैं।
जनता की नाराजगी और नकारात्मक लोकप्रियता
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ अमेरिकी जनता इन टेक-बिलियनेर्स के उत्पादों और सेवाओं को तेजी से अपना रही है, तो दूसरी तरफ उनके प्रति निराशा भी लगातार बढ़ रही है। मस्क और जकरबर्ग जैसे प्रमुख कारोबारियों की लोकप्रियता रेटिंग्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हॉलीवुड अब बिग टेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को नकारात्मक रूप में पेश कर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि आम जनता की प्रतिक्रिया और तीखी हो सकती है।

अहंकार और सत्ता से सांठगांठ के आरोप
इन नई फिल्मों का मुख्य विषय यह है कि सिलिकॉन वैली अहंकार और दर्प से ग्रस्त हो चुकी है। निर्देशकों ने इन किरदारों को इस तरह दिखाया है मानो वे सरकारों से परे हैं और नियमों की परवाह नहीं करते। इन टेक दिग्गजों को अब अवसरवादी और एकाधिकारवादी के रूप में देखा जाने लगा है, जिनकी सत्ता प्रतिष्ठान के साथ सांठगांठ है। यही कारण है कि परदे पर उन्हें खलनायक के रूप में पेश करना आसान हो गया है और लोगों में उनके प्रति नाराजगी साफ दिखाई देती है।

