आज के समय में नई पीढ़ी सोशल मीडिया और डिजिटल उपकरणों से जरूरत से ज्यादा जुड़ती जा रही है। मोबाइल, टैबलेट और अन्य गैजेट्स के साथ अधिक समय बिताने के कारण बच्चे धीरे-धीरे अकेलेपन यानी आइसोलेशन की तरफ बढ़ रहे हैं। इस स्थिति के कारण बच्चों के हाथ अवसाद भी लग सकता है, जो अभिभावकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। ऐसे में घर के बड़े लोगों को बच्चों की मानसिक सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

मॉम-डैड गिल्ट और बच्चों के साथ समय
आजकल माता-पिता के बीच ‘मॉम-डैड गिल्ट’ शब्द काफी चलन में है। कई माता-पिता इस बात को लेकर अफसोस महसूस करते हैं कि वे अपने बच्चों को वह सब नहीं दे पाए जो उन्हें मिलना चाहिए था। मनोवैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, बच्चों को जीवन में कुछ भी सार्थक और सकारात्मक देने का सबसे अच्छा समय तब होता है जब वे रात को सोने जाते हैं। इस महत्वपूर्ण समय पर माता-पिता को अपने बच्चों के साथ रहना चाहिए और उन्हें मनोरंजक व हल्के-फुल्के माहौल में देव-स्मरण कराना चाहिए।
प्रभु सुमिरन के लिए बच्चों पर न बनाएं दबाव
यह बहुत जरूरी है कि प्रभु के सुमिरन या ईश्वर स्मरण के लिए बच्चों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव न डाला जाए। सुमिरन की प्रक्रिया जितनी अधिक हल्के-फुल्के और सहज वातावरण में होगी, उसका बच्चों के मन पर परिणाम उतना ही गहरा और दूरगामी होगा। दबाव बनाने से बच्चे इस प्रक्रिया से दूर भाग सकते हैं, इसलिए माहौल को हमेशा आनंददायक और तनावमुक्त रखना चाहिए।

सोने से पहले हनुमान चालीसा का महत्व
विशेष तौर पर यह प्रयास किया जाना चाहिए कि बच्चों को जब रात को नींद आने लगे, तो सोने से पहले वे हनुमान चालीसा जरूर बोलें। सोते समय हनुमान चालीसा रूपी मंत्र का उच्चारण बच्चों की इंद्रियों को नींद की अवस्था में भी इतना सशक्त और मजबूत बना देता है कि जब वे अगली सुबह बिस्तर से उठते हैं, तो उनके अंदर एक अलग ही ऊर्जा और नए आत्मविश्वास का संचार होता है। इस प्रकार की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण आदतें बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करती हैं और उन्हें गैजेट्स के दुष्प्रभावों से भी दूर रखती हैं।

