सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को दिया छह लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को दिया छह लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार को छह लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के एक व्यक्ति को छह साल तक जेल में रहना पड़ा, जो न्याय व्यवस्था की एक गंभीर विफलता है।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को दिया छह लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश

जांच और मुकदमे पर अदालत की सख्त टिप्पणी

न्यायालय की पीठ ने इस मामले को आपराधिक जांच का एक क्लासिक उदाहरण बताया कि कैसे जांच नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि केवल अटकलों और कल्पित कहानी के आधार पर एक व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता को खतरे में डाल दिया गया। पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपने नागरिकों की रक्षा करने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती है, खासकर तब जब किसी आरोपी को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है।

छह साल जेल में बिताने के बाद मिला न्याय

यह मामला अक्टूबर 2019 में आगरा जिले में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। याचिकाकर्ता को नवंबर 2019 में हिरासत में लिया गया था और वह लंबे समय तक जेल में बंद रहा। मार्च 2026 में शीर्ष अदालत ने मुकदमे को तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का नाम एफआईआर में नहीं था और उसे केवल सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य सह-आरोपी के कथित इकबालिया बयान के आधार पर फंसाया गया था।

अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के निर्देश

पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में राज्य पुलिस को अपने अधिकारियों को जांच प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षित करना चाहिए। अदालत ने इस आदेश की एक प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और गृह सचिव को भेजने का निर्देश भी दिया है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।

Anju Kunwar

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