सर्वोच्च अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत पूर्व अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को विवाह के रूप में मान्यता देने की मांग उठाई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने तीखी टिप्पणी की और इसे ‘विलासिता वाली मुकदमेबाजी’ करार दिया है।

याचिका खारिज करने की मुख्य वजह और पृष्ठभूमि
अनीता आडवाणी दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के जीवन के अंतिम वर्षों के दौरान उनके साथ रहीं थीं। खन्ना का निधन वर्ष 2012 में हो गया था, जिसके बाद से ही यह पूरा विवाद शुरू हुआ था। आडवाणी ने कानूनी रूप से अपने इस पुराने रिश्ते को वैवाहिक मान्यता दिलाने की अपील की थी और कहा था कि वह अपनी गरिमा की मांग कर रही हैं। हालांकि, इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस याचिका पर विचार करने के लिए कानून या तथ्यों का कोई भी ठोस आधार मौजूद नहीं है।
लंबी कानूनी लड़ाई का सफर और निचली अदालतों के फैसले
यह पूरा कानूनी मामला काफी लंबे समय से विभिन्न अदालतों में चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट पहुँचने से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अपने एक अप्रैल के आदेश में अनीता आडवाणी की याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने उस अपील को नामंजूर किया था जिसमें मुंबई की दिनदोशी सत्र अदालत के वर्ष 2017 के फैसले को चुनौती दी गई थी। सत्र अदालत ने अपने उस पुराने आदेश में उनके दीवानी मुकदमे को खारिज कर दिया था, जिसके बाद से मामला उच्च न्यायालय और फिर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा था।
अंतिम फैसले से बंद हुए कानूनी रास्ते
सुप्रीम कोर्ट के इस ताज़ा और अंतिम फैसले के बाद, अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अपने संबंधों को आधिकारिक कानूनी मान्यता दिलाने की लंबे समय से कोशिश कर रहीं अनीता आडवाणी के लिए अब देश में आगे के सभी कानूनी रास्ते पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। इस उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों ने इस लंबी कानूनी प्रक्रिया पर विराम लगा दिया है।

