त्योहारी सीजन में मिठाइयों पर चांदी के वर्क की शुद्धता और सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

त्योहारी सीजन में मिठाइयों पर चांदी के वर्क की शुद्धता और सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में तरह-तरह की मिठाइयों की भारी मांग देखने को मिलती है और इन्हें अधिक आकर्षक बनाने के लिए अक्सर उन पर चांदी का वर्क लगाया जाता है। हालांकि, इस चमकदार परत की शुद्धता और इसमें अन्य धातुओं के इस्तेमाल की संभावना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी मानव शरीर के लिए कोई आवश्यक पोषक तत्व नहीं है, इसलिए लोगों को ऐसी मिठाइयों का अत्यधिक सेवन करने से बचना चाहिए।

त्योहारी सीजन में मिठाइयों पर चांदी के वर्क की शुद्धता और सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और निर्माण प्रक्रिया

मिठाइयों को सजाने की यह प्रथा भारत में काफी पुरानी है और माना जाता है कि मध्यकाल में मुगल शाही रसोइयों ने भोजन और मिठाइयों की सुंदरता बढ़ाने के लिए चांदी की बेहद पतली परतों का उपयोग शुरू किया था। पारंपरिक रूप से चांदी के छोटे टुकड़ों को बार-बार हथौड़े से पीटकर बेहद पतली चादरें तैयार की जाती थीं, जिसमें उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से इसके पारंपरिक उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान समय में इस निर्माण प्रक्रिया में मशीनों का भी उपयोग किया जाने लगा है।

खाद्य सुरक्षा मानक और नियम

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य उत्पादों में उपयोग होने वाले चांदी के वर्क के लिए स्पष्ट मानक तय किए हैं। खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली चांदी 99.99 प्रतिशत शुद्ध होनी चाहिए और इसमें एल्यूमीनियम, कैडमियम या निकल जैसी अन्य धातुएं नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों का यह भी कहना है कि वर्क असली है या नकली, यह केवल प्रयोगशाला परीक्षण के माध्यम से ही पूरी तरह स्थापित किया जा सकता है। चांदी की बढ़ती कीमतों के कारण भी मिठाइयों पर लगने वाली इस परत की गुणवत्ता पर संदेह गहराने लगा है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव और परीक्षण के तरीके

चिकित्सकों का मानना है कि भारी धातुओं के दुष्प्रभावों पर कई अध्ययन मौजूद हैं, लेकिन सामान्य खानपान के दौरान भोजन के जरिए चांदी के सेवन के प्रभावों को पूरी तरह समझने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है। कुछ लोग घर पर ही उंगलियों से रगड़कर या गर्म करके वर्क की जांच करने का दावा करते हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ये घरेलू तरीके भरोसेमंद नहीं हैं। उपभोक्ताओं को एल्यूमीनियम या अन्य धातुओं की मिलावट का पता लगाने के लिए केवल प्रयोगशाला परीक्षणों पर ही भरोसा करना चाहिए।

Anju Kunwar

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