तमिलनाडु के तिरुपट्टूर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक घरेलू सहायिका को करोड़ों रुपये का जीएसटी नोटिस थमा दिया गया है। इस घटना के बाद से पीड़िता और उसका परिवार गहरे सदमे में है, जबकि अधिकारियों द्वारा उसका बैंक खाता भी सील कर दिया गया है।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए फर्म चलाने का आरोप
वाणीयम्बदी के न्यू टाउन इलाके की रहने वाली यास्मीन घरों में काम करती हैं, जबकि उनके पति ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करते हैं। उन्हें चेन्नई के कमर्शियल टैक्सेज डिपार्टमेंट के पूनमल्ली ऑफिस से एक डिमांड नोटिस मिला, जिसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए ‘टीवीएल यास ट्रेडर्स’ नामक फर्म के नाम पर भारी-भरकम जीएसटी बकाया चुकाने की मांग की गई है। नोटिस के अनुसार यह व्यवसाय चेन्नई के मोगप्पैरल ईस्ट में चल रहा था।
यास्मीन ने दावा किया है कि इस व्यवसाय से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उनके आधार और पैन कार्ड जैसे पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग करके उनके नाम पर यह फर्जी फर्म खड़ी कर दी और कर का भुगतान नहीं किया।
बैंक खाता सील होने से बढ़ी मुश्किलें
कर विभाग द्वारा भेजे गए नोटिस और बैंक खाता सील किए जाने के कारण इस गरीब परिवार की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि वे घर की जरूरी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी अपने पैसों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
दस्तावेजों के दुरुपयोग की अन्य घटनाएं
इस तरह की यह अकेली घटना नहीं है। इससे पहले पिछले महीने एक अन्य दैनिक मजदूर इकबाल को भी 29 करोड़ रुपये का जीएसटी नोटिस मिलने का मामला सामने आया था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि उनकी पहचान का इस्तेमाल करके भी अवैध रूप से व्यापार चलाया जा रहा था। इन लगातार सामने आ रही वारदातों के बाद से कमजोर वर्ग के लोगों की पहचान के दुरुपयोग के मामलों की गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

