आंध्र प्रदेश के पूर्व आबकारी सचिव रजत भार्गव ने विजयवाड़ा एसीबी कोर्ट के समक्ष एक बयान दर्ज कराया है, जिसमें दावा किया गया है कि राज्य में शराब से जुड़ा कथित घोटाला पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी और निर्देशों के तहत अंजाम दिया गया था। यह मामला वाईएसआरसीपी शासनकाल के दौरान का बताया जा रहा है, जिसमें कई बड़े खुलासे सामने आए हैं।

अदालत में दिए गए बयान के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के करीबी अधिकारियों और तत्कालीन सीएमओ के निर्देश पर शराब के बेस प्राइस (मूल कीमतों) में भारी बढ़ोतरी की गई थी। पूर्व नौकरशाह ने बताया कि डिस्टिलरी और आपूर्तिकर्ताओं से कथित तौर पर भारी रिश्वत वसूलने और उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ये आदेश जारी करवाए गए थे।
सरकारी आदेशों और दबाव को लेकर किए गए खुलासे
रजत भार्गव ने न्यायालय को बताया कि उन्हें तत्कालीन सीएमओ के प्रमुख अधिकारियों से फोन पर निर्देश मिलते थे और वे इस स्थिति में अकेले विरोध करने में असमर्थ थे। उनका कहना था कि यदि सरकार को राजस्व बढ़ाना था, तो बेस प्राइस बढ़ाने के बजाय एमआरपी बढ़ाई जानी चाहिए थी, लेकिन उनके सुझावों को नजरअंदाज कर दिया गया। भार्गव के अनुसार, उन्हें यह अहसास हो गया था कि यह सब डिस्टिलरी को बड़ा भुगतान करने के बदले में रिश्वत हासिल करने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।
आबकारी विभाग के नियंत्रण और नियमों में बदलाव
बयान में यह भी कहा गया है कि साल 2019 से पहले शराब आपूर्ति के आदेश जारी करने का अधिकार आबकारी आयुक्त के पास था, जिसे बाद में बदल दिया गया। इसके अलावा, आबकारी विभाग को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया गया और स्पेशल एन्फोर्समेंट ब्यूरो (एसईबी) की स्थापना की गई, जिससे कथित तौर पर प्रवर्तन कमजोर हुआ। भार्गव ने आरोप लगाया कि आपूर्तिकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिए मनमाने ढंग से बड़े ऑर्डर दिए गए और इस पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया।
पूर्व आबकारी सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि जब उन्होंने कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की कोशिश की और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाही, तो उन्हें ऊपर से रोक दिया गया। उन्हें बताया गया कि ये निर्देश सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री के हैं, जिसके बाद उन्हें इस मामले में अपनी व्यवस्था की सीमाओं का अहसास हुआ।

