दिन के समय ली जाने वाली छोटी झपकी सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकती है। यह शरीर और दिमाग को तरोताजा करने के साथ ही मानसिक कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आदत बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो यह किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है।

झपकी के वैज्ञानिक और मानसिक लाभ
कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन के अनुसार, रातभर जागने वाले लोगों के लिए 90 मिनट की झपकी याददाश्त और कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। इस तरह की नींद दिमाग को नई जानकारी को बेहतर तरीके से समझने और ग्रहण करने के अनुकूल स्थिति में ले जाती है। जो छात्र पढ़ाई के लिए अक्सर अपनी रात की नींद कम करते हैं, उनके लिए यह तरीका काफी मददगार हो सकता है। इसके अलावा, केवल 20 मिनट की छोटी झपकी से सतर्कता और मूड दोनों को बेहतर किया जा सकता है।
किन लोगों के लिए यह फायदेमंद है?
नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों, छोटे बच्चों के माता-पिता और अलग-अलग टाइम जोन में यात्रा करने वाले लोगों के लिए दिन की झपकी काफी लाभकारी हो सकती है। इसके अलावा, बुजुर्गों पर किए गए अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि दोपहर के समय सोने से आम तौर पर उनकी रात की नींद पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।

कब बन सकती है यह समस्या?
सभी लोगों के लिए दिन में सोना फायदेमंद नहीं होता है। जिन लोगों को रात में ठीक से नींद न आने की पुरानी समस्या यानी क्रॉनिक इन्सोम्निया है, उनके लिए दिन की झपकी स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकती है। दिन के समय लगातार अत्यधिक उनींदापन महसूस होना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर में कोई आंतरिक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत चल रही है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी हो जाता है।

