मानवता की सेवा है चिकित्सा पेशे का मूल लक्ष्य: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

मानवता की सेवा है चिकित्सा पेशे का मूल लक्ष्य: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि चिकित्सा पेशे का मुख्य उद्देश्य मानवता की सेवा करना होना चाहिए। उन्होंने यह बात हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में स्थित एम्स के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही।

मानवता की सेवा है चिकित्सा पेशे का मूल लक्ष्य: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

चिकित्सकों का संवेदनशीलता और करुणापूर्ण व्यवहार

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि जब कोई बीमार व्यक्ति डॉक्टर के पास जाता है, तो वह अपनी बीमारी के डर और अनिश्चितता के साथ-साथ उम्मीद भी लेकर आता है। उन्होंने जोर दिया कि चिकित्सक अपने ज्ञान से बीमारी की पहचान करते हैं और कौशल से इलाज करते हैं, लेकिन उनका संवेदनशीलता और करुणापूर्ण व्यवहार मरीज को हिम्मत देता है। उन्होंने डॉक्टरों से अपने पेशे में श्रेष्ठता के साथ-साथ करुणा को भी अपनाने का आह्वान किया।

एम्स संस्थानों की भूमिका और जिम्मेदारी

राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि न्यूनतम लागत में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा एम्स संस्थानों की पहचान रही है। देशवासियों को इन संस्थानों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि एम्स बिलासपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए उसकी एक विशेष जिम्मेदारी है कि वह हिमाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली आबादी तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाए। टेलीमेडिसिन, विशेषज्ञ परामर्श और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किया जा सकता है।

मानवता की सेवा है चिकित्सा पेशे का मूल लक्ष्य: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता

राष्ट्रपति मुर्मु ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि बड़ी बीमारियों का खर्च उठाना आम लोगों के लिए बहुत कठिन होता है। इस समस्या को कम करने के लिए सरकार द्वारा आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एम्स जैसे अग्रणी संस्थानों के पास किफायती, सुलभ और कम लागत वाले स्वास्थ्य समाधान विकसित करने का सुनहरा अवसर है।

Anju Kunwar

Learn More →