केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि देश की न्याय व्यवस्था को अब समयबद्ध बनाया जा रहा है, जिससे नागरिकों को त्वरित न्याय मिल सके। नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने से लेकर उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) तक की पूरी न्यायिक प्रक्रिया मात्र तीन साल के भीतर पूरी हो जाएगी।

न्यायिक प्रक्रिया में आएगा बड़ा बदलाव
गृह मंत्री भोपाल के भेल (BHEL) क्षेत्र स्थित दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों से जुड़ी एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पशुपालकों के एक सम्मेलन को भी संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि भारतीय न्याय प्रणाली पहले न्याय मिलने में देरी के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली
सहकारिता और गृह मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे मंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के पूरी तरह लागू होने के बाद भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली दुनिया की सबसे आधुनिक व्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगी। देश में नए कानून—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—1 जुलाई 2024 से लागू किए जा चुके हैं।
नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कदम
देशभर में मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियानों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार एक ठोस कार्ययोजना पर काम कर रही है। इसके तहत मध्य प्रदेश में 31 दिसंबर 2029 के बाद नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की यह पहल राज्य और देश के युवाओं को सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक अहम कदम है।

