दिल्ली में निजी जमीन पर स्कूल खोलने की योजना बनाने वाले संस्थानों और पब्लिक ट्रस्टों को बड़ी प्रशासनिक राहत दी गई है। सरकार ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन रूल्स, 1973 में संशोधन करते हुए निजी भूमि पर स्कूल स्थापित करने से जुड़ी लंबी और जटिल प्रक्रियाओं को समाप्त कर दिया है। इस बदलाव के बाद अब संस्थानों को जनहित के आकलन और अन्य औपचारिकताओं से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी।

जरूरी प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त
संशोधित नियमों के अनुसार, जो संस्थान निजी स्वामित्व वाली जमीन पर स्कूल खोलना चाहते हैं, उन्हें अब एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट यानी आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करने की जरूरत नहीं होगी। पहले नियम के तहत सरकार यह जांच करती थी कि संबंधित क्षेत्र में नए स्कूल की वास्तविक आवश्यकता है या नहीं और उस इलाके में पहले से कितने स्कूल चल रहे हैं। शिक्षा मंत्री आशिष सूद के अनुसार, इन प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण जमीन उपलब्ध होने पर भी स्कूलों के निर्माण में अनावश्यक देरी होती थी।
प्रक्रिया और कानून में बदलाव
इस नीतिगत बदलाव के लिए सरकार ने पहले ही रूपरेखा तैयार कर ली थी। इस साल 10 अगस्त को एक मसौदा संशोधन जारी किया गया था जिस पर जनता और अन्य हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां मांगी गई थीं। निर्धारित अवधि के भीतर कोई भी आपत्ति या सुझाव प्राप्त न होने के बाद, सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करके 30 सितंबर को आधिकारिक राजपत्र में इस संशोधन को अधिसूचित कर दिया गया।
जमीन की श्रेणियों के आधार पर अलग प्रावधान
नए नियमों में स्कूलों के निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली जमीन की श्रेणियों को अलग-अलग परिभाषित किया गया है:
- निजी जमीन: यदि कोई संस्थान अपनी निजी जमीन पर स्कूल स्थापित करना चाहता है, तो उस पर जनहित का आकलन और पूर्व अनुमोदन का नियम लागू नहीं होगा।
- सरकारी या संस्थागत जमीन: यदि जमीन सरकार या किसी स्थानीय निकाय से रियायती दरों पर या नीलामी के माध्यम से प्राप्त की गई है, तो अधिकारियों द्वारा स्कूल की आवश्यकता और जनहित की जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी।
सरकार का मानना है कि इस कदम से निजी निवेशकों और शैक्षणिक ट्रस्टों को दिल्ली में नए स्कूल खोलने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक बाधाएं दूर करने का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करना नहीं है, बल्कि निर्धारित मानकों के तहत संस्थानों के विस्तार को आसान बनाना है।

