दिल्ली-देहरादून हाईवे पर स्थित सिवाया टोल प्लाजा पर मंगलवार को 21 एंबुलेंस कर्मचारियों ने अचानक नौकरी से निकाले जाने के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच स्थिति तनावपूर्ण रही, लेकिन बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप से मामला सुलझ गया।

कम्पनी बदलने के कारण पैदा हुआ विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 1033 आधुनिक एंबुलेंस सेवा का संचालन ‘एचएलएल’ कंपनी को सौंप दिया है। इससे पहले यह सेवा ‘गणपति कंस्ट्रक्शन’ के अधीन संचालित हो रही थी। कर्मचारियों का आरोप है कि संचालन बदलने की प्रक्रिया में उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या तीन महीने के नोटिस के अचानक हटा दिया गया, जिससे 21 कर्मचारी बेरोजगार हो गए। प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे सुपरवाइजर अमित मलिक और अन्य कर्मियों ने बताया कि उनके पास भारी वाहन चलाने का वैध लाइसेंस है और नई कंपनी उन्हें पहले ही प्रशिक्षण दे चुकी है, इसके बावजूद उन्हें अकुशल बताकर बाहर कर दिया गया।
पूर्व विधायक और अधिकारियों का हस्तक्षेप
विवाद बढ़ने पर एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर साकेत मिश्रा, सरधना के एसडीएम उदित नारायण सेंगर और दौराला के सीओ शिवा ठाकुर मौके पर पहुंचे। इस दौरान पूर्व विधायक संगीत सोम भी धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने अधिकारियों के समक्ष कड़ा रुख अपनाते हुए स्थानीय युवाओं को नौकरी से हटाने के फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि अल्पकालिक टेंडरों के कारण व्यवस्था बिगड़ती है और स्थानीय युवाओं को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
इस तरह समाप्त हुआ धरना
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के बायोडाटा जमा किए और उन्हें नौकरी पर बनाए रखने का पूरा आश्वासन दिया। अधिकारियों की इस सकारात्मक प्रतिक्रिया और पूर्व विधायक की मध्यस्थता के बाद कर्मचारियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

