वाराणसी के लोहता क्षेत्र में परंपरा से जुड़ा ऐतिहासिक छड़ी मेला शनिवार शाम को शुरू हो गया है। इस पारंपरिक आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है, और यह मेला निर्धारित समय के अनुसार सोमवार तक संचालित होगा। मेले के पहले दिन शाम को ही सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं और कार्यक्रमों का सिलसिला आरंभ हो गया।

पीतल की छड़ी की स्थापना और मेले का दायरा
इस पारंपरिक आयोजन की शुरुआत धमरिया कस्बे में स्थित धम्मदार बाबा के स्थान से हुई। वहां से एक विशेष पीतल की छड़ी लाई गई, जिसे महमूदपुर बाजार में स्थापित किया गया। इस छड़ी की स्थापना के साथ ही मेले का औपचारिक शुभारंभ हो गया। यह पूरा मेला लगभग एक किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। मेले का विस्तार मीना बाजार, अलावल, रहीमपुर और धमरिया कस्बे तक है, जहां विभिन्न प्रकार की दुकानें सज चुकी हैं।
मनोरंजन और खरीदारी के लिए सजी दुकानें
रविवार से शुरू होकर यह मेला सोमवार तक चलेगा। इस दौरान मेला परिसर में आगंतुकों के लिए कई तरह के आकर्षण मौजूद हैं। बच्चों और बड़ों के मनोरंजन के लिए झूले और चरखी लगाए गए हैं। इसके अलावा, मेले में आने वाले लोगों के लिए खानपान की विभिन्न वस्तुएं और साज-शृंगार की दुकानें भी आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं, जहां लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
इस सदियों पुराने मेले की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कई विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मेले के दौरान मुशायरा, नातिया कलाम और कव्वाली जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इन आयोजनों से पूरे क्षेत्र का माहौल और अधिक जीवंत हो जाता है, जिससे लोहता का यह पारंपरिक मेला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता है।

