दिल्ली एयरपोर्ट पर कॉकरोच जसनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद पार्टी के आंदोलन की पूरी कमान अजिंक्य शिंदे के हाथों में आ गई है। संगठन के महत्वपूर्ण विरोध-प्रदर्शन से ठीक पहले नेताओं के रोके जाने के बाद यह निर्णय लिया गया, ताकि आंदोलन बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके।

शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति में जिम्मेदारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके के साथ-साथ सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया था। शीर्ष नेतृत्व की इस अचानक गैर-मौजूदगी के बाद आंदोलन को निरंतर जारी रखने के लिए अभिजीत दीपके ने पहले से तैयार एक वीडियो के माध्यम से अजिंक्य शिंदे को विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व सौंपने की घोषणा की। CJP के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी इस वीडियो में यह स्पष्ट किया गया कि जब तक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा नहीं हो जाते, तब तक अजिंक्य शिंदे ही इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व संभालेंगे और सभी को उनका समर्थन करना चाहिए।
अजिंक्य शिंदे की समर्थकों से अपील
नेतृत्व संभालते ही अजिंक्य शिंदे ने पार्टी के सभी समर्थकों से अपील की है कि वे जंतर-मंतर की ओर बढ़ना जारी रखें। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सरकार इस जन-एकजुटता से डरी हुई है। शिंदे ने समर्थकों को यह निर्देश भी दिए कि यदि पुलिस रास्ते में उन्हें रोकती है, तो वे हताश होने के बजाय उसी स्थान को अपना जंतर-मंतर मान लें और वहीं से विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दें।
कौन हैं अजिंक्य शिंदे?
अजिंक्य शिंदे की पृष्ठभूमि की बात करें तो वह 35 वर्ष के हैं और महाराष्ट्र से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट हैं। अपने राजनीतिक और पेशेवर सफर की शुरुआत में उन्होंने पुणे की एक अंतरराष्ट्रीय आईटी कंपनी में काम किया था। इसके बाद वह आम आदमी पार्टी (AAP) में एक फुल-टाइम वर्कर के तौर पर शामिल हुए। आप की महाराष्ट्र टीम में उन्होंने सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर और महाराष्ट्र यूथ विंग के कन्वीनर के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं।
व्यक्तिगत जीवन के संदर्भ में, रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनके माता-पिता अलीबाग में किसान थे और बाद में लातूर में जाकर बस गए थे। अजिंक्य शिंदे लंबे समय से अभिजीत दीपके के करीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं। दोनों की पहली मुलाकात साल 2016 में गोवा में हुई थी, जिसके बाद से वे लगातार साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके बाद 6 अगस्त 2026 को अभिजीत दीपके ने उन्हें आधिकारिक रूप से CJP की टीम में शामिल किया और संगठन प्रभारी की अहम जिम्मेदारी सौंपी। इससे पहले जुलाई में हुए CJP के प्रदर्शन के दौरान भी अजिंक्य शिंदे ने बैकस्टेज रहकर प्रदर्शन की कमान संभाली थी और अब मुख्य नेतृत्व के हिरासत में जाने के बाद वह इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गए हैं।

