दक्षिण अटलांटिक महासागर के सेंट हेलेना द्वीप पर रहने वाला विशाल कछुआ जोनाथन इन दिनों अपनी असाधारण उम्र और वैज्ञानिक अध्ययन के चलते चर्चा में है। 1832 में जन्मा यह कछुआ वर्तमान में 194 वर्ष का हो चुका है और अपनी प्रजाति की सामान्य उम्र से काफी अधिक जीवन जी रहा है। वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस जीव की लंबी उम्र के पीछे छिपे जैविक और आनुवंशिक कारणों को जानने के लिए उसके डीएनए का विस्तृत अध्ययन किया है।

विशेष जीन वेरिएंट्स और डीएनए रिपेयर की क्षमता
वैज्ञानिकों द्वारा ‘साइंस एडवांसेज’ में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, जोनाथन के शरीर में लगभग 287 ऐसे खास जीन वेरिएंट्स मौजूद हैं जो उम्र बढ़ने के साथ होने वाले सेलुलर नुकसान से मुकाबले में मदद करते हैं। उसके जीनोम में ट्यूमर को दबाने, क्षतिग्रस्त डीएनए की मरम्मत करने और इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित रखने की क्षमता बेहद मजबूत पाई गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जोनाथन की कोशिकाएं अत्यधिक उम्र के बावजूद काफी हद तक युवा जीवों जैसी आनुवंशिक सुरक्षा बनाए रखती हैं।
स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां और दैनिक जीवन
मोतियाबिंद के कारण जोनाथन अब देख नहीं सकता और उसकी सूंघने की क्षमता भी खत्म हो चुकी है, लेकिन उसकी सुनने की ताकत अभी भी अच्छी है। वह अपने पशु चिकित्सक की आवाज पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है जो उसे अपने हाथों से भोजन कराते हैं। अपने बाड़े में वह कम उम्र के अन्य कछुओं के साथ रहता है और उसका वजन लगभग 180 किलोग्राम है।

भविष्य की एंटी-एजिंग थेरेपी के लिए उम्मीद
शोधकर्ता अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि जोनाथन के शरीर में काम करने वाली इस प्राकृतिक जैविक प्रणाली का उपयोग इंसानों में माइटोकॉन्ड्रियल स्वास्थ्य उपचार और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने वाली थेरेपी के लिए कैसे किया जा सकता है। इंसानों में समय के साथ डीएनए क्षति को ठीक करने वाले आंतरिक तंत्र कमजोर पड़ जाते हैं, जबकि जोनाथन का शरीर अपने जेनेटिक कोड को बेहतर ढंग से संरक्षित रखने में सक्षम रहा है।

