दिल्ली हाई कोर्ट के पास सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अधिकारियों को दी चेतावनी

दिल्ली हाई कोर्ट के पास सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अधिकारियों को दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली हाई कोर्ट के समीप सड़क सुरक्षा की खराब स्थिति पर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस मामले में न्यायपालिका ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि स्थिति में सुधार न होने पर वे खुद कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

दिल्ली हाई कोर्ट के पास सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अधिकारियों को दी चेतावनी

सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन पर गहरी चिंता

यह पूरा कानूनी मामला दिल्ली हाई कोर्ट के पास मथुरा रोड पर स्थित क्रॉसिंग से जुड़ा हुआ है। अदालत ने इस विशेष क्षेत्र में पर्याप्त ट्रैफिक प्रबंधन और पैदल चलने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम न होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सुनवाई के दौरान बेंच ने यह भी रेखांकित किया कि अधिकारियों को केवल उच्च-स्तरीय बैठकों और समितियों की चर्चाओं या बैठकों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर वास्तविक और ठोस काम दिखना आवश्यक है ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

अधिकारियों को 25 नवंबर तक का अल्टीमेटम

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों को आगामी 25 नवंबर तक का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तय समय के अंदर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया तो राज्य के मुख्य सचिव को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के साथ अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा। इसके साथ ही, बेंच ने इस मामले की जांच और निगरानी के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति की आवश्यकता पर सवाल उठाए और सुझाव दिया कि एमिकस क्यूरी को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि मौके पर मौजूद सटीक और वास्तविक समस्याओं की सही पहचान कर उनका उचित तथा त्वरित समाधान निकाला जा सके।

जमीनी स्तर पर काम पूरा करने की चेतावनी

सुनवाई के दौरान जजों ने अपनी बात रखते हुए हल्के-फुल्के लेकिन बेहद सख्त अंदाज में कहा कि अगर तय समय सीमा तक अधिकारियों द्वारा कार्य पूरा नहीं किया जाता है, तो वे दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य गेट के पास बैठ जाएंगे और तब तक वहां से नहीं हिलेंगे जब तक काम पूरा नहीं हो जाता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वे संबंधित अधिकारियों को भी तब तक अपने घरों को नहीं लौटने देंगे जब तक सड़क सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण और लंबित कार्य को पूरी तरह से अंजाम तक नहीं पहुँचा दिया जाता। सुप्रीम कोर्ट ने इस संपूर्ण मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है, जिससे संबंधित विभागों पर समय सीमा के भीतर काम खत्म करने का भारी दबाव बन गया है।

Anju Kunwar

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