केरल के 12 वर्षीय स्कूली छात्र लेविन पॉलोज ने अपनी मां के दैनिक श्रम और थकान को कम करने के लिए कबाड़ के सामान से कई अनूठे उपकरण बनाए हैं। पारंपरिक और मेहनतकश परिवारों में बच्चे अक्सर अपनी मां को रसोई और घर के दूसरे कामों में अकेले लगातार संघर्ष करते देखते हैं। जिनके पास पैसे होते हैं, वे वॉशिंग मशीन या आधुनिक कुकिंग स्टोव जैसे कंज्यूमर अप्लायंसेस खरीद लेते हैं, लेकिन हर परिवार के पास महंगे साधन नहीं होते। ऐसे में लेविन ने साबित कर दिया कि अपनों के प्रति गहरा प्रेम और संवेदनशीलता बच्चों में नई वैज्ञानिक सोच और नवाचार को जन्म दे सकती है। बिना किसी महंगे बजट या आधुनिक प्रयोगशाला के उन्होंने घर को ही ‘डू इट योरसेल्फ’ वाली कार्यशाला में बदल दिया।

कबाड़ और बेकार चीजों से तैयार किए रोबोटिक उपकरण
लेविन ने कार्डबोर्ड, पुराने तारों, इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों, छोटी इलेक्ट्रिक मोटरों, धागों और प्लास्टिक के कचरे का इस्तेमाल करके घरेलू कामकाज में मदद करने वाले कई गैजेट्स तैयार किए। जहां दूसरे लोगों को केवल कचरा दिखाई देता था, वहां उन्हें अपनी मां की थकान दूर करने के उपाय नजर आए। उनके इन आविष्कारों में ऑटोमेटेड फूड स्ट्रिरर और रोटी मेकर शामिल हैं, जो लगातार खाना बनाने की शारीरिक मेहनत को कम करते हैं और मां को गर्म स्टोव से दूर रखते हैं। इसके अलावा उन्होंने साधारण प्लास्टिक कंटेनरों और मोटरों की मदद से रोबोटिक फ्लोर क्लीनर बनाया, जो झाड़ू लगाते वक्त झुकने से होने वाली तकलीफ को दूर करता है। पानी लाने और घरेलू कचरे के निपटारे के लिए उन्होंने वेस्ट एंड वॉटर असिस्टेंट बनाया, कार्डबोर्ड ह्यूमनॉइड स्ट्रक्चर तैयार किया, और खिड़कियों के ऊपर मोटराइज्ड ट्रैक लगाकर रिमोट-कंट्रोल्ड कर्टेन मूवर भी बनाया। इन सभी उपकरणों ने उनकी मां के रोजमर्रा के थकाऊ कामों को काफी हद तक आसान बना दिया है।
सोशल मीडिया पर छाई कहानी और मिला सम्मान
लेविन के काम करने की प्रक्रिया और उनके द्वारा बनाए गए गैजेट्स की यह कहानी इंटरनेट पर काफी चर्चा में आ गई। वह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वाभाविक इंजीनियरिंग प्रोसेस शेयर करते हैं, जिसमें दर्शक केवल तैयार गैजेट्स ही नहीं बल्कि जटिल वायरिंग और विफल कोशिशों को भी देखते हैं। उनके इस जुझारू और प्रेरणादायक सफर ने सरकार के उच्चतम स्तर का ध्यान आकर्षित किया। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने उन्हें सम्मानित किया और बिना किसी संसाधन के हाई-लेवल ऑटोमेशन के उपकरण बनाने के लिए इस यंग इनोवेटर की तारीफ की।

इंजीनियरिंग को व्यावहारिक जीवन से जोड़ने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ इंजीनियरिंग को एक ऑब्जर्वेशन सब्जेक्ट के तौर पर इंट्रोड्यूस कराना चाहिए। बच्चों को अपने घर के आसपास नजरें घुमाकर यह देखने के लिए प्रेरित करना चाहिए कि उनके माता-पिता, दादा-दादी या भाई-बहनों को किन कामों में परेशानी होती है। कौन से ऐसे बार-बार किए जाने वाले और थकाऊ काम हैं जिनसे दिन खत्म होते-होते वे थक जाते हैं। बच्चों की इस हमदर्दी को इनोवेशन में बदलकर यह सिखाया जा सकता है कि इंजीनियरिंग केवल एक अकादमिक विषय नहीं, बल्कि अपने प्रियजनों की केयर करने का एक साधन है।

