दिल्ली की जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में हाल ही में हुए संशोधनों के विरोध में सोमवार को एक दिन के कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है। वकीलों का यह विरोध ट्रैफिक चालान के निपटान के नए तंत्र और नियमों में किए गए बदलावों को लेकर सामने आया है। समिति ने इन संशोधनों को मनमाना और अनुचित करार देते हुए अपनी नाराजगी जताई है।

नियमों में क्या हैं मुख्य आपत्तियां?
बार बॉडी ने संशोधन के तहत तीन प्रमुख बिंदुओं पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। इनमें विवादित चालानों के निपटारे की न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियों को उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (SDMs), कार्यकारी मजिस्ट्रेट और अन्य विभागीय अधिकारियों को सौंपे जाने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा, खाद्य एवं आपूर्ति, तहसीलदार और परिवहन विभाग के अधिकारियों को चालान के निवारण के लिए नामित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अनिवार्य पूर्व-जमा राशि पर चिंता
समिति ने चालान खारिज होने के बाद अदालत का रुख करने के लिए 50 प्रतिशत राशि पहले ही जमा करने की अनिवार्य शर्त का भी विरोध किया है। वकीलों का कहना है कि यह प्रावधान आम नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच में एक बड़ी बाधा पैदा करता है। नए नियमों के अनुसार, चालान मिलने पर तय समय सीमा के भीतर उसका भुगतान करना होता है या पोर्टल के जरिए विरोध दर्ज कराना होता है।
न्यायिक और कार्यकारी शक्तियों का अलगाव
समिति का तर्क है कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के उस अधिकार से जुड़ा है जिसके तहत विवादित चालानों की सुनवाई एक सक्षम न्यायिक मंच द्वारा होनी चाहिए। इस मुद्दे पर पहले भी संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी गई थी, लेकिन जब आश्वासन के बावजूद विभिन्न विभागों के अधिकारियों को अधिसूचित कर दिया गया, तो वकीलों को यह कदम उठाना पड़ा।
वकीलों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन
जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, सभी सदस्य वकीलों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी अदालत में पेश न हों। इसके साथ ही, वकीलों ने अपने-के अपने अदालत परिसरों के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया है। बार एसोसिएशनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

