सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर समय-सीमा तय करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर समय-सीमा तय करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद के समाधान के लिए चुनाव आयोग से एक निश्चित समय-सीमा तय करने को कहा है। अदालत ने यह निर्देश ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए हैं, जिसमें पार्टी के भीतर चल रहे गुटीय विवाद और चुनाव आयोग में लंबित फैसले का मुद्दा उठाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर समय-सीमा तय करने का निर्देश दिया

शीर्ष अदालत का निर्देश और सुनवाई

शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच चल रहे इस विवाद का निपटारा जल्द से जल्द किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले हुए अन्य राजनीतिक दलों के गुटीय विवादों का भी जिक्र किया। इस मामले में चुनाव आयोग को इस बात की जानकारी देने के लिए सोमवार तक का समय दिया गया है कि इस विवाद का स्थायी समाधान कब तक निकाल लिया जाएगा।

पश्चिम बंगाल में उपचुनाव और अस्थायी आवंटन

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर आगामी 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होने हैं, जिनके नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। राज्य में होने वाले इन उपचुनावों से ठीक पहले पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के कारण स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है। चुनाव आयोग ने पार्टी के मूल नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न पर फिलहाल रोक लगा रखी है।

  • चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को अस्थायी रूप से ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है।
  • अरूप रॉय के गुट को उपचुनाव के लिए ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है।

राजनीतिक हलकों में इस विवाद पर चुनाव आयोग के अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह साफ हो सके कि भविष्य में पार्टी का आधिकारिक नाम और चिह्न किसके पास रहेगा।

Anju Kunwar

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