ग्रामीण स्तर पर आम लोगों के दैनिक कार्यों का निस्तारण गांव में ही सुलभ कराने के उद्देश्य से बनाए गए ग्राम सचिवालय अपनी उपयोगिता साबित करने में असफल दिख रहे हैं। कई स्थानों पर यह सचिवालय केवल शोपीस बनकर रह गए हैं, जिससे शासन की मूल मंशा अधूरी साबित हो रही है। इस व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालित न होने के कारण स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सुविधाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

ताले में कैद ग्राम सचिवालय और कर्मचारियों की अनुपस्थिति
अधिकांश ग्राम सचिवालयों के मुख्य द्वारों पर दिनभर ताले लटके रहते हैं। इक्का-दुक्का गांवों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर सचिवालयों में जिम्मेदार कर्मचारी या तो आते ही नहीं हैं या फिर कभी-कभार केवल एक-दो घंटे के लिए आकर वापस लौट जाते हैं। नियमित रूप से कर्मचारियों के कार्यालय में न मिलने के कारण ग्रामीणों के बीच नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। शासन की ओर से गांवों में ही जरूरी कामकाज के निपटारे के लिए ये केंद्र बनाए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।
ब्लॉक और तहसील के लगाने पड़ रहे चक्कर
सचिवालयों के हमेशा बंद रहने से ग्रामीणों को अपने आवश्यक एवं सामान्य कार्यों के लिए मजबूरन विकास खंड कार्यालय और तहसीलों के चक्कर काटने पड़ते हैं। विकास खंड करछना के अंतर्गत आने वाली अस्सी ग्राम पंचायतों में गांवों के भीतर पंचायत सहायकों की तैनाती की गई है। इसके बावजूद कुछ चुनिंदा गांवों को छोड़कर अधिकतर गांवों में पंचायत सचिवालयों पर हमेशा ताला ही लटका रहता है, जिससे जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
निदौरी मामला और प्रशासनिक कार्रवाई
ग्रामसभा निदौरी के कुशगढ़ स्थित पंचायत भवन में भी अक्सर ताला लटका रहने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर यह पता चला कि वहां शायद ही कभी कोई कर्मचारी नियमित रूप से बैठता है और कभी-कभार ही आधे-एक घंटे के लिए कोई आता है। इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा रही है। एडीओ पंचायत दिनेश चंद्र पाठक ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि निदौरी में सचिवालय बंद रहने की शिकायत मिलने पर वहां तैनात पंचायत सहायक को नोटिस जारी की जा रही है ताकि व्यवस्था में सुधार लाया जा सके और सरकारी योजनाओं का लाभ सही मायनों में जनता तक पहुंच सके।

