पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) परिसर में कथित घटना को लेकर रविवार को छात्रों ने भारी हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया था। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने अफवाहों को खारिज करते हुए एक वीडियो साझा किया है, जिसमें कुछ छात्राएं इन दावों को गलत बता रही हैं। हालांकि, वीडियो में नजर आ रही छात्राओं का कहना है कि उनकी क्लिप को बिना अनुमति के कांट-छांट कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया है।

रजिस्ट्रार का बयान और छात्रों का प्रदर्शन
रविवार को एलपीयू परिसर में तब स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब एक छात्रा के साथ दुष्कर्म होने की अफवाह फैली। इसके बाद छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय परिसर के बाहर नई दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग को घंटों तक जाम रखा। पुलिस के अनुसार, करीब पंद्रह घंटे से अधिक समय तक चले इस अवरोध के बाद सोमवार को यातायात को सुचारू रूप से बहाल किया जा सका और स्थिति नियंत्रण में लाई गई।
यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया और इन्हें मनगढ़ंत व निराधार बताया। उनका कहना था कि कुछ असामाजिक तत्व और निहित स्वार्थ वाले लोग संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश के तहत ऐसी झूठी अफवाहें फैला रहे हैं।
छात्राओं के दावे और वीडियो पर आपत्ति
प्रशासन द्वारा जारी किए गए वीडियो में रजिस्ट्रार के अलावा हॉस्टल के एक कमरे की तीन छात्राएं भी नजर आईं। वीडियो में इन छात्राओं ने स्पष्ट किया कि उनके कमरे में ऐसी कोई घटना नहीं घटी है और वे पिछले कुछ समय से वहां रह रही हैं। उन्होंने अपील की कि पुलिस और छात्रों को उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए।
दूसरी ओर, इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद संबंधित छात्राओं ने दावा किया कि विश्वविद्यालय द्वारा उनका वीडियो उनकी सहमति के बिना और एडिट करके साझा किया गया है। छात्राओं का कहना है कि इस क्लिप के सामने आने के बाद उन्हें अनावश्यक रूप से आलोचना और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन का तर्क है कि सच्चाई सामने लाने के लिए यह वीडियो जारी किया गया था, जबकि विवाद अब भी बना हुआ है।

