राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा की गई कथित बर्बरता के आरोपों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विभिन्न विपक्षी नेताओं ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।

विपक्षी नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे बेहद शर्मनाक करार दिया है। उनका कहना है कि जो महिलाएं समाज में हो रही हिंसा के खिलाफ आवाज उठा रही थीं, वे खुद पुलिसकर्मियों के कथित दुर्व्यवहार का शिकार बन गईं। इसके अलावा, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस मामले को उठाया और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कवर कर रही महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से सवाल किया कि क्या महिलाओं के साथ इस तरह का बर्ताव उचित है और इस पर तुरंत संज्ञान क्यों नहीं लिया जा रहा है।
न्याय और सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि रक्षक माने जाने वाले सुरक्षाकर्मियों पर ही ऐसे गंभीर आरोप लगेंगे, तो आम महिलाओं के सामने न्याय की गुहार लगाने के लिए कोई विकल्प नहीं बचेगा। उधर, आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज और उनके कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले में त्वरित एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
आगे की सुगबुगाहट और मार्च
इस पूरे घटनाक्रम के बीच छात्र नेताओं और विभिन्न संगठनों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई तथा महिला विरोधी व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया है। विरोध प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सड़कों से लेकर प्रदर्शन स्थलों तक महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और इस मामले में शामिल जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

