अमेरिका की एक नई डिफेंस स्टार्ट-अप कंपनी पावरस ने पाकिस्तानी सेना के साथ एक रक्षा समझौता किया है, जिसके तहत मानव रहित हवाई सिस्टम के लिए शुरुआती ऑर्डर हासिल किया गया है। फ्लोरिडा स्थित इस कंपनी का पाकिस्तान के साथ यह सौदा दक्षिण एशियाई क्षेत्र के शक्ति संतुलन और भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है।

यूक्रेनी तकनीक और भारत-पाक से जुड़ाव
पावरस कंपनी के पास रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान विकसित की गई अग्रिम यूक्रेनी काउंटर-ड्रोन तकनीक गार्जियन का एक्सेस उपलब्ध है। दिलचस्प बात यह है कि यह अमेरिकी कंपनी पहले से ही भारतीय रक्षा बाजार में भी सक्रिय है। जून के दौरान पावरस की एक सहायक कंपनी ने भारत की पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज को गार्जियन-1 काउंटर ड्रोन इंटरसेप्टर देश में निर्मित करने का लाइसेंस प्रदान किया था। अब उसी अमेरिकी कंपनी द्वारा यह तकनीक पाकिस्तान को ट्रांसफर किए जाने से दोनों पड़ोसी देशों के साथ एक ही समय पर सैन्य सहयोग बनाए रखने पर चर्चा शुरू हो गई है।
राजनीतिक और ट्रंप परिवार से जुड़े तार
यह पूरा मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि पावरस के संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़े हुए बताए गए हैं। पावरस का विलय हाल ही में ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स के साथ हुआ है, जिसमें ट्रंप परिवार के सदस्यों की अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 9.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दूसरी तरफ, इस सौदे को लेकर पाकिस्तान के भीतर भी असहजता का माहौल देखा गया है, जिसका मुख्य कारण कंपनी के सह-संस्थापक का इजरायली रक्षा बल से पुराना संबंध होना है। हालांकि, चीन और तुर्किए पर अपनी निर्भरता को कम करने की दिशा में पाकिस्तान इस समझौते को अपने रक्षा साजो-सामान के स्रोतों में विविधता लाने के रूप में देख रहा है।
द्विपक्षीय संबंधों और सैन्य क्षमताओं पर असर
विशेषज्ञ इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या यह निजी समझौता अमेरिका और पाकिस्तान के बीच पहले ठंडे पड़े रक्षा संबंधों की फिर से बहाली का संकेत है। प्रशासन द्वारा पिछले साल दिसंबर में पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए करोड़ों डॉलर के स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी पैकेज को मंजूरी दी जा चुकी है। हालांकि किसी एक निजी फर्म का सौदा सीधे तौर पर अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव का प्रमाण नहीं माना जाता, लेकिन आधुनिक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के मिलने से पाकिस्तानी सेना की क्षमताओं में इजाफा होना तय है और भारत इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है।

