कांग्रेस नेता राहुल गांधी विपक्षी दलों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और युवाओं के साथ मिलकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक एक मार्च का नेतृत्व करेंगे। इस मार्च के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें वोट चोरी रोकने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक लगाने की मांग की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और मुख्य मांगें
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि यह मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा और इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, जातियों और समुदायों से ऊपर उठकर लोग शामिल होंगे। उन्होंने युवाओं और नागरिकों से एकजुट होकर आगे आने की अपील की। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं को रोका गया और उनके साथ ज्यादती की गई।
मल्लिकार्जुन खरगे का बयान
बेंगलुरु में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश के मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में स्थिति अघोषित आपातकाल जैसी बन चुकी है। उनका आरोप है कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पुलिस बल का सहारा ले रही है और युवाओं की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
मार्च को लेकर उठी प्रतिक्रियाएं
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदिश सी. अग्रवाल ने राहुल गांधी से इस प्रस्तावित मार्च को रद्द करने की अपील की है। उनका तर्क है कि इस तरह के कदमों से न्यायपालिका पर अनावश्यक राजनीतिक दबाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य न्यायाधीश के पास प्रशासनिक क्षमता के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने का अधिकार नहीं होता है, और चुनाव आयोग से जुड़ी शिकायतों को उचित न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही उठाया जाना चाहिए।

