वैश्विक स्तर पर वित्तीय और सरकारी संस्थानों को निशाना बनाकर किए जा रहे साइबर हमलों के मद्देनजर भारत सरकार ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना शुरू कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हाल ही में फाइनेंशियल स्टैब्लिटी एंड डेवलपमेंट काउंसिल (एफएसडीसी) की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्य रूप से बैंकों और वित्तीय सेवाओं को साइबर सुरक्षा प्रदान करने तथा ग्राहकों की जमा राशि की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा के लिए नई रणनीति
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय के साथ-साथ वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों और वित्तीय सेवा विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। पिछले साल वित्तीय क्षेत्र के नियामकों और सरकारी एजेंसियों ने मिलकर फाइनेंशियल सेक्टर साइबर सिक्योरिटी स्ट्रैटजी (एफएससीएसएस) तैयार की थी। इसके अंतर्गत जल्द ही एक साझा साइबर इंसिडेंट रिपोर्टिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जो चौबीस घंटे सक्रिय रहकर एक मल्टी-एजेंसी कंट्रोल रूम के रूप में काम करेगा।
ग्रामीण बैंकों से लेकर डिजिटल भुगतान तक पहरा
विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक वित्तीय सेवाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं, जिसके कारण किसी एक हिस्से पर हमला होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों, छोटे बैंकों, बीमा क्षेत्र, डिजिटल भुगतान तंत्र, क्लियरिंग सिस्टम और मार्केट ट्रेडिंग सिस्टम जैसी सभी प्रमुख संस्थाओं की सुरक्षा का मूल्यांकन और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
संभावित खतरों से निपटने की तैयारी
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली एजेंसी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सर्ट) ने वेबसाइट संचालन में प्रयुक्त होने वाली प्रोग्रामिंग भाषा पीएचपी में कमियों के जरिए संभावित हमलों की आशंका जताई है। सरकार की इस व्यापक योजना का उद्देश्य देश के संपूर्ण वित्तीय और संवेदनशील सूचना ढांचे को किसी भी प्रकार की डिजिटल सेंधमारी से सुरक्षित रखना है।

